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  • बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जितने वाले 68 प्रतिशत आपराधिक छवि वाले

    बिहार विधानसभा चुनाव के मौसम में हर चुनाव की तरह इस बार भी अपराधिक छवि के लोग चुनावी मैदान होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। बिहार की राजनीति में आपराधिक पृष्टभूमि वाले नेताओं की मौजदूगी लगातार बनी हुई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में 243 सीट में से 163 विधायक ऐसे थे, जिसपर


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    बिहार विधानसभा चुनाव के मौसम में हर चुनाव की तरह इस बार भी अपराधिक छवि के लोग चुनावी मैदान होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। बिहार की राजनीति में आपराधिक पृष्टभूमि वाले नेताओं की मौजदूगी लगातार बनी हुई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में 243 सीट में से 163 विधायक ऐसे थे, जिसपर आपराधिक मामले दर्ज थे। यानी 68 प्रतिशत दागदार थे। इनमें से 123 पर तो गंभीर अपराधों के आरोप थे। इसके उलट 78 विधायक यानी 32 प्रतिशत ऐसे भी थे, जिन पर कोई केस नहीं था। जबकि 52 विधायकों पर सिर्फ एक केस दर्ज था। राजद से मोकामा विधायक बने अनंत सिंह ने चुनाव के दौरान शपथपत्र में 38 केस दर्ज होन की बात स्वीकार की थी और पटना क बेउर जेल में रहते हुए भी चुनाव जीत गए। वहीं भाकपा (माले) के अगिगांव से विधायक मनोज मंजिल पर 30 केस दर्ज था।


    एसोसिएशन फाॅर डेमोक्रेटिक रिफाॅर्मस (एडीआर) की रिपोर्ट बताती है कि 2020 में कुल 3720 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, इनमें से 1201 (32 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले थे, जब कि 917 प्रत्याशियों पर गंभीर आरोप दर्ज थे। इनमें 467 उम्मीदवार राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय दलों से जुड़े थे और 734 प्रत्याशियों गैर मान्यता प्राप्त दलों या निर्दलीय थे। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक राजद के 74 विधायकों में से 54 यानी 73 प्रतिशत पर आपराधिक केस थे। भाजपा के 73 विधायकों में 47 दागी थें। वहीं, एआईएमआईएम के पांचों विधायकों पर केस दर्ज होने से दागदार है।


    साल 2020 में चुने गए विधायको में सभी दलों ने दागदार छवि वालों का उम्मीदवार बनाया, जिनमें राजद के 74 विधयकों में 54 दागदार छवि यानी 73 प्रतिशत थी। वहीं सत्ताधारी दल भाजपा एवं जदयू में कितने दागदार छवि के विधायक हैं। जिनमें भाजपा के 73 विधायकों में 47 दागदार हैं यानी 64 प्रतिशत, वहीं जदयू के 43 विधायकों में 20 विधायक दागदार हैं यानी 46 प्रतिशत हैं। कांग्रेस के 19 विधयकों में 16 दागदार हैं यानी 84 प्रतिशत। माले के 12 विधायकों में 10 दागदार हैं यानी 83 प्रतिशत मौजूद हैं। एआईएएम के 5 विधायकों में सभी दागदार हैं यानी सौ प्रतिशत। वहीं वीआईपी के 4 विधायकों में 3 दागदार हैं यानी 75 प्रतिशत। हम के 4 विधायकों में 2 दागदार हैं यानी 50 प्रतिशत। सीपीआई के 2 दागदार हैं।


    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 23 सितंबर 2025 को यह रिपोर्ट जारी की, ताजा रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति की हकीकत को सामने ला दिया है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि देश के 643 मंत्रियों में से 302 (47ः) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें से 174 मंत्री गंभीर अपराधों जैसे हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध में आरोपित हैं.
    यह रिपोर्ट उस समय आई है, जब केंद्र सरकार संसद में ऐसे विधेयक पेश कर रही है, जिनमें प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर अपराधों में गिरफ्तार होकर 30 दिन से अधिक जेल में रहता है तो उसे पद से हटना होगा। एडीआर ने यह अध्ययन 27 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मंत्रियों के चुनावी हलफनामे के आधार पर किया है.

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    किन राजनीतिक दलों के मंत्रियों पर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले ?


    रिपोर्ट से पता चलता है कि क्रिमिनल बैकग्राउंड से जुड़े नेता केवल किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है. लगभग सभी प्रमुख दलों के मंत्रियों पर मामले दर्ज हैं, जो इस प्रकार हैरू


    ऽभाजपा के 336 मंत्रियों में से 136 (40ः) पर आपराधिक मामले, 88 (26ः) पर गंभीर आरोप।
    ऽकांग्रेस के 61 मंत्रियों में से 45 (74ः) पर आपराधिक मामले, 18 (30ः) पर गंभीर अपराध हैं।
    ऽद्रमुक रू 31 में से 27 (87ः) पर आपराधिक आरोप, 14 (45ः) पर गंभीर मामले हैं।
    ऽतृणमूल कांग्रेस टीएमसी 40 में से 13 (33ः) पर मामले, 8 (20ः) पर गंभीर आरोप हैं।
    ऽतेदेपा टीडीपी 23 में से 22 (96ः) पर मामले, 13 (57ः) पर गंभीर अपराध हैं।
    ऽआप 16 में से 11 (69ः) पर मामले, 5 (31ः) पर गंभीर आरोप.
    ऽकेंद्रीय मंत्रिमंडल – 72 मंत्रियों में से 29 (40ः) पर आपराधिक मामले हैं।


    यह आंकड़े दिखाते हैं कि आपराधिक मामलों से घिरे मंत्री किसी एक पार्टी की समस्या नहीं बल्कि पूरे भारतीय राजनीतिक तंत्र की गहरी चुनौती हैं है।


    कहां सबसे ज्यादा क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले मंत्री ?


    राज्यों का विश्लेषण करने पर तस्वीर और भी गंभीर दिखती है. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और पुडुचेरी में 60ः से ज्यादा मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड और उत्तराखंड राज्यों के मंत्रियों ने अपने खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है. यह अंतर बताता है कि कुछ राज्यों में राजनीति पूरी तरह क्रिमिनल बैकग्राउंड से जुड़ी हुई है, जबकि कुछ राज्य इससे लगभग मुक्त हैं।


    मंत्रियों की संपत्ति करोड़ों से लेकर अरबों तक का सफर


    रिपोर्ट ने केवल क्रिमिनल बैकग्राउंड ही नहीं बल्कि वित्तीय स्थिति पर भी रोशनी डालती है. रिपोर्ट के मुताबिक देश में मौजूद मंत्रियों की औसत संपत्ति 37.21 करोड़ रुपये है. सभी 643 मंत्रियों की कुल संपत्ति लगभग 23,929 करोड़ रुपये आंकी गई है। 30 विधानसभाओं में से 11 में अरबपति मंत्री मौजूद हैं.

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    सबसे अमीर मंत्रियों की लिस्ट इस प्रकार है,


    डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी टीडीपी आंध्र प्रदेश)- 5,705 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति.
    डी.के. शिवकुमार (कर्नाटक कांग्रेस, उप मुख्यमंत्री) – 1,413 करोड़ रुपये से ज्यादा.
    एन. चंद्रबाबू नायडू (तेदेपा, मुख्यमंत्री) – 931 करोड़ रुपये से अधिक.
    शीर्ष 10 अमीर मंत्रियों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और केंद्र के मंत्री शामिल हैं, जिनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी है।
    सबसे कम संपत्ति वाले मंत्री
    एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कम प्रॉपर्टी वाले लिस्ट में निम्नलिखित नेताओं के नाम संपत्ति के साथ शामिल है-
    शुक्ला चरण नोआतिया (त्रिपुरा, आईपीएफटी) – केवल 2 लाख रुपये की संपत्ति.
    बीरबाहा हंसदा (पश्चिम बंगाल, टीएमसी) – 3 लाख रुपये से थोड़ी अधिक.
    क्या कहती है एडीआर रिपोर्ट?
    एडीआर ने साफ किया है कि हलफनामे में घोषित आपराधिक मामले और संपत्ति की स्थिति 2020 से 2025 के बीच बदली हो सकती है. हालांकि, यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारतीय राजनीति में क्रिमिनल बैकग्राउंड और भारी संपत्ति वाले नेताओं का दबदबा लगातार बना हुआ है।
    एडीआर की रिपोर्ट रू क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे में से करीब 91 फीसदी) पांच पार्टियों को गया. एडीआर की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
    एआरडी की रिपोर्ट रू देश में क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे में से 113.791 करोड़ रुपये (करीब 91 फीसदी) पांच पार्टियों को गया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. एडीआर द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत के चुनाव आयोग के समक्ष क्षेत्रीय दलों द्वारा घोषित चंदे पर केंद्रित है।

    रिपोर्ट में सामने आई ये जानकारी
    रिपोर्ट के मुताबिक, घोषित चंदे के मामले में शीर्ष 5 क्षेत्रीय दल जदयू (जदयू), द्रविड़ मुनेत्र कषगम डीएमके आम आदमी पार्टी (आप), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआएस) हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय दलों को मिले कुल चंदे का 91.38 फीसदी यानी 113.791 करोड़ रुपये इन दलों के खजाने में गया है. जहां जदयू, द्रमुक और टीआरएस ने अपने चंदे में वृद्धि की घोषणा की है. वहीं, आप और आईयूएमएल ने वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में चंदे में कमी की जानकारी दी है।
    54 में से केवल 6 ने निर्धारित समय अवधि के भीतर जमा की रिपोट


    द्रमुक, टीआरएस, जदयू और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने वित्त वर्ष 2019-20 और वित्त वर्ष 2020-21 के बीच चंदे से अपनी आय में अधिकतम प्रतिशत वृद्धि देखी. रिपोर्ट में शामिल 54 क्षेत्रीय दलों में से केवल 6 ने निर्धारित समय अवधि के भीतर निर्वाचन आयोग को अपनी दान रिपोर्ट जमा की। 25 अन्य दलों ने अपनी प्रस्तुति देने में तीन से 164 दिन तक की देरी की. 27 क्षेत्रीय दलों द्वारा घोषित चंदे की कुल राशि 3,051 चंदे से 124.53 करोड़ रुपये थी. इसमें 20,000 रुपये से ज्यादा और कम दोनों रकम शामिल हैं।
    इन दलों से नहीं मिली चंदा मिलने की जानकारी वित्त वर्ष 2020-21 के लिए झामुमो, एनडीपीपी, डीएमडीके और आरएलटीपी द्वारा चंदा मिलने की कोई जानकारी नहीं दी गई है. प्राप्त चंदे के मामले में, जदयू 330 दान से 60.155 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष स्थान पर है. उसके बाद द्रमुक है, जिसे 177 दान से 33.993 करोड़ रुपये मिले हैं. आम आदमी पार्टी ने चंदे से 11.328 करोड़ रुपये प्राप्त करने की घोषणा की. आईयूएमएल और टीआरएस ने क्रमशः 4.165 करोड़ रुपये और 4.15 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की घोषणा की है।


    चुनाव सुधार को लेकर काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) ने 27 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के कुल 643 मंत्रियों के शपथ पत्रों (एफिडेविट) का विश्लेषण किया है।
    देशभर के 302 मंत्री यानी करीब 47ः ने स्वयं पर आपराधिक केस होने की बात स्वीकार की है। इनमें से 174 मंत्री ऐसे हैं जिन पर हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।

    उधर, केंद्र सरकार के 72 मंत्रियों में से 29 यानी 40ः ने आपराधिक केस होने की बात स्वीकार की है।
    एडीआर ने यह भी बताया है कि जिन शपथ पत्रों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है, वे 2020 से 2025 के बीच चुनावों के दौरान दाखिल किए गए थे। इन मामलों की स्थिति बदल भी सकती है।
    11 राज्यों में 60ः मंत्री पर आपराधिक मामले
    आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और पुडुचेरी में 60ः से ज्यादा मंत्री आपराधिक मामलों में आरोपी हैं।
    वहीं जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, नागालैंड और उत्तराखंड के किसी भी मंत्री पर कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है।
    643 मंत्रियों की संपत्ति का विश्लेषण एडीआर ने पाया है कि 643 मंत्रियों की कुल घोषित संपत्ति 23,929 करोड़ रुपये है। औसतन हर मंत्री के पास 37.21 करोड़ रुपये की संपत्ति है। 30 में से 11 विधानसभाओं में अरबपति मंत्री हैं। कर्नाटक में सबसे ज्यादा 8 अरबपति मंत्री हैं, आंध्र प्रदेश में 6 और महाराष्ट्र में 4। केंद्र सरकार में 72 मंत्रियों में से 6 (8ः) मंत्री अरबपति हैं।
    143 महिला सांसदों व विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज संगठन ने कुछ समय पहले महिला सांसदों और विधायकों को लेकर भी एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें सामने आया कि देश की कुल 512 महिला सांसदों और विधायकों में से 143 (28ः) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 78 (15ः) पर हत्या, किडनैपिंग जैसे गंभीर आरोप हैं।
    17 महिला नेताओं ने अपने चुनावी हलफनामों में अरबपति यानी 100 करोड़ या उससे अधिक संपत्ति होने का दावा किया है। इनमें लोकसभा की 6 राज्यसभा की 3 और विधानसभा की 8 सदस्य शामिल हैं। 512 महिला सांसदों-विधायकों की कुल घोषित संपत्ति 10,417 करोड़ रुपये है। औसतन हर एक के पास 20.34 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
    रिपोर्ट के अनुसार, 71ः महिला नेता ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़ी-लिखी हैं। 24ः ने 5वीं से 12वीं तक की पढ़ाई की है, जबकि 12 महिलाओं ने डिप्लोमा किया है। महिला सांसदों-विधायकों में 64ः की उम्र 41 से 60 साल, 22ः की 25 से 40 साल और 14ः की 61 से 80 साल के बीच है।

    किस पार्टी की कितनी महिला नेताओं पर आपराधिक मामले


    ऽ भाजपा, 217 महिला सांसद-विधायक में से 23ः पर आपराधिक मामले, 11ः पर गंभीर मामले।
    ऽ कांग्रेस, 83 महिला सांसद-विधायक में से 34ः पर आपराधिक केस, 20ः पर गंभीर मामले।
    ऽ टीडीपी, 20 महिला सांसद-विधायक में से 65ः पर आपराधिक केस, 45ः पर गंभीर केस।
    ऽ आप, 13 महिला सांसद-विधायक में से 69ः पर आपराधिक मामले, 31ः पर गंभीर केस।
    45ः विधायकों पर आपराधिक मामले, 1205 पर गंभीर केस
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के 45ः विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। संगठन ने देश के 28 राज्यों और विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 4123 विधायकों में से 4092 के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया।
    आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक, 174 में से 138 (79ः) विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि सिक्किम में सबसे कम, 32 में से सिर्फ 1 विधायक (3ः)।
    टीडीपी के सबसे ज्यादा 134 विधायकों में से 115 यानी 86ः पर आपराधिक केस दर्ज हैं।
    बिहार विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर चुनाव आयोग बेहद चैकस है. इस बार चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए नियमों में भी काफी बदलाव किया गया है। चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के पारदर्शिता को लेकर इस बार अलग कदम उठाए हैं. जिसमें अपराधिक मुकदमें झेल रहे उम्मीदवारों को अखबारों में अपने अपराधिक मामलों का जिक्र करना होगा. इसके लिए चुनाव आयोग ने दिन तय कर दिए हैं. बिहार चुनाव 2020 ( बिहार चुनाव 2020) से पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और इलेक्शन वाच 23 सितबंर 2025 को ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस कर पहले चरण में होने वाले मतदान के लिए अपनी रिपोर्ट सामने रखी है. जिसमें पहले फेज के सभी उम्मीदवारों का ब्यौरा सामने रखा गया है.
    चुनाव आयोग को गच्चा देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई- नेश्नल इलेक्शन वॉच
    नेश्नल इलेक्शन वॉच के बिहार स्टेट कॉडिनेटर राजीव कुमार ने कहा कि राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग को गच्चा देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. दागी छवि वालों ने बिहार विधानसभा इलेक्शन 2020 में अपनी पत्नी को धड़ल्ले से टिकट दिलवाया है.
    प्रत्याशियों के पास धन का आंकड़ा
    5 करोड़ या उससे अधिक- 9ः
    2 करोड़ से 5 करोड़ तक -12ः
    50 लाख से 2 करोड़ तक- 28ः
    10 लाख से 50 लाख तक- 30ः
    10 लाख से कम -22ः


    एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव 2020 में करोड़पति उम्मीदवारों का आंकड़ा
    राजद- 95ः, जदयू-89ः, बीजेपी-83ः, लोजपा-73ः, कांग्रेस-67ः, बसपा- 46ः।
    एडीआर की रिपोर्ट: साल 2019-20 में भाजपा को मिला सबसे ज्यादा कॉरपोरेट चंदा, पढ़िए बाकी राजनीतिक दलों का हाल
    एडीआर के एक विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के बीच राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले कॉरपोरेट चंदे में 109 फीसदी का इजाफा हुआ है।


    वित्त वर्ष 2019-20 में कॉरपोरेट और कारोबारी संगठनों ने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को 921.95 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। इसमें सबसे ज्यादा चंदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिला था। एसोसिएशन फॉर डडेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को इस वित्त वर्ष में कुल 720.407 करोड़ रुपये कॉरपोरेट चंदा प्राप्त हुआ था। इस रिपोर्ट में पांच पार्टिों के मिले दान का विश्लेषण किया गया था।


    चुनावी राजनीति में पारदर्शिता लाने के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन एडीआर के एक विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के बीच राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले कॉरपोरेट चंदे में 109 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह विश्लेषण पार्टियों की ओर से निर्वाचन आयोग को दी गई दानकर्ताओं की जानकारी पर किया गया है, जिन्होंने एक वित्त वर्ष में 20,000 रुपये से अधिक का दान दिया है।


    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में अपराधी छवि वाले उम्मीदवार


    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण से पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट ने चैंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण में मैदान में उतरे 1,303 उम्मीदवारों में से 423 (32ः) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि इनमें से 354 (27 प्रतिशत) उम्मीदवार गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
    पहले चरण में कुल 121 सीटों पर मतदान होना है। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि 33 उम्मीदवारों पर हत्या से संबंधित मामले, 86 पर हत्या के प्रयास, और 42 उम्मीदवार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में आरोपी हैं।
    राजद के 70 उम्मीदवारों में से 53 (76ः) दागी हैं। भाजपा के 48 में से 31 (65ः) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। कांग्रेस के 23 में से 15 (65ः) उम्मीदवारों पर केस दर्ज हैं। जदयू के 57 में से 22 (39ः) उम्मीदवारों पर आरोप हैं। आप के 44 में से 12 (27ः) उम्मीदवारों पर मामले है। जनसुराज पार्टी के 114 में से 50 (44ः) और बसपा के 89 में से 18 (20ः) उम्मीदवारों पर भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा, भाकपा (माले) के 14 में से 13 (93ः), भाकपा के सभी 5 (100ः), माकपा के 3 (100ः), और लोजपा (रामविलास) के 13 में से 7 (54ः) उम्मीदवारों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं.


    गंभीर मामलों में राजद और भाजपा सबसे आगे


    गंभीर अपराधों के मामलों में भी प्रमुख पार्टियों की स्थिति चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक-
    राजद के 70 में से 42 (60ः) उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप हैं. भाजपा के 48 में से 27 (56ः), भाकपा (माले) के 14 में से 9 (64ः), और कांग्रेस के 23 में से 12 (52ः) उम्मीदवार गंभीर मामलों में आरोपी हैं. वहीं, जनसुराज पार्टी के 114 में से 49 (43ः), लोजपा (रामविलास) के 13 में से 5 (38ः), जदयू के 57 में से 15 (26ः), बसपा के 89 में से 16 (18ः), और भाकपा के 5 में से 4 (80ः) उम्मीदवारों पर भी गंभीर धाराओं में केस हैं।
    40 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति
    रिपोर्ट के मुताबिक कुल 1,303 उम्मीदवारों में से 519 (40ः) करोड़पति हैं. उम्मीदवारों की औसत घोषित संपत्ति ₹3.26 करोड़ है. यह आंकड़ा बताता है कि चुनावी मैदान में उतरने वाले अधिकतर प्रत्याशी वित्तीय रूप से मजबूत हैं.
    उम्मीदवारों की शिक्षा और पृष्ठभूमि
    शैक्षिक योग्यता के अनुसार, 519 (40ः) उम्मीदवार 5वीं से 12वीं तक शिक्षित हैं, जबकि 651 (50ः) उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं. यह दर्शाता है कि बिहार चुनाव में शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम उम्मीदवारों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है.
    महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी केवल 9ः

    पहले चरण में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी मात्र 9 प्रतिशत है. बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।

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    Abhishek Kumar is the editor of Nutan Charcha News. Who has been working continuously in journalism for the last many years? Abhishek Kumar has worked in Doordarshan News, Radio TV News and Akash Vani Patna. I am currently publishing my news magazine since 2004 which is internationally famous in the field of politics.
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