देश के लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर भारत के प्रधानमंत्री लोकसभा में अपना धन्यवाद भाषण लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष माननीय राहुल गांधी के द्वारा रचित चक्रव्यूह में फंस कर दे नहीं पाये।
जननायक राहुल गांधी में समझ तो है l बिना समझ के तो हर बार संसद पर वर्चस्व क़ायम कर लेना आसान नहीं है l वे समूची भाजपा को नचा देते है l शीर्षासन करवा देते है। सारे योग प्राणायाम भी। समूची भाजपा को सिर के बल खड़ा कर देते है l लोकसभा में ऐन स्पीकर के सामने खड़े हो कर अपना आक्रोश व्यक्त करते रहने का आत्मविश्वास तो है। अभी तक किसी नेता प्रतिपक्ष को ऐसा करते देखा या सुना नहीं गया।
यह मोदी जी की कायरता से उपजी हुई हनक है। राहुल गांधी को समझना मोदी जी के लिये नामुमकिन है। क्योंकि राहुल गाँधी बहुत समझदार आदमी है।
पहले के समय में लोग कहते थे कि मोदी की पिच पर राहुल गांधी खेलते है। अब का मंज़र यह है कि मोदी समेत समूची भाजपा राहुल गांधी की पिच पर पस्त है। हर बार मोदी जी को राहुल गांधी लोकसभा में घेर कर गिरा देते है। लोक सभा में राहुल से लड़ना नहीं आता। हर बार हार जाते है मोदी जी, राहुल जी के आगे। इसलिए कि राहुल गांधी समझदार बहुत है।
यह राहुल गांधी का ही डर है कि ओ बी सी को ख़ुश करने के लिए जातीय जनगणना और यू जी सी एक्ट लाना पड़ता है मोदी जी को। यह राहुल गांधी की पिच है। जो आत्मविश्वास राहुल गांधी के चेहरे पर मोदी जी को अपनी आक्रोशित तेवर में चित्त करने के बाद दीखता है, मोदी जी के चेहरे पर यह आत्मविश्वास कभी किसी ने देखा हो तो बताए भी।
राहुल गांधी अपने कोर वोटर की पीठ में कभी मोदी जी की तरह छुरा नहीं घोंपते। मोदी जी को इस में महारत है। महारत तो ममता बनर्जी जी की भी देखने लायक़ है कि दिल्ली आ कर जिस तरह चुनाव आयोग में अपनी बात चुनाव आयुक्त को सुना कर बिना उसको सुने उठ गई। वकीलों की फ़ौज को साथ ले कर सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील ख़ुद को उपस्थित किया, शेरनी की तरह गरज कर मोदी के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। ममता बनर्जी भी अपने कोर वोटर के लिए कर रही है। दहाड़ती हुई घूम रही है।
पर मोदी जी ?
अपने वोटर का दुःख-दर्द नहीं जानते। अपने वोटर को चूस कर सिर्फ़ सत्ता का शहद जानते है। अपने वोटर को इमोशनली ब्लैकमेल करते रहना है। टेकेन फॉर ग्रांटेड लिए रहते है। अपने वोटरों को जातियों के खाने में बांट कर आपस में लड़ा देते है। आरक्षण अस्सी से पचासी प्रतिशत करने के मंसूबे पाले हुए है ताकि 2029 में फिर सत्ता का शहद चखे।
इसीलिए कभी राहुल गांधी तो कभी ममता बनर्जी अपनी ही पिच पर ला कर मोदी जी को लुढ़का देती है।
अब आप ही बताइए कि नासमझ कौन है ?
राहुल गांधी कि नरेंद्र मोदी ?
राहुल गांधी तो ललकार रहे है कि एप्स्टीन फ़ाइल के कारण मोदी जी ट्रंप से कंप्रोमाइज कर गए।
यह भी राहुल की पिच है जहां वह मोदी जी को लुढ़का रहे है।
राहुल गांधी का सामना नहीं कर पा रहे, मोदी जी देश का, देश की समस्याओं का क्या सामना करेंगे ? फिर तमन्ना ग्लोबल लीडर बनने की है।
“राहुल गांधी की पिच पर लुढ़कते नरेंद्र मोदी जी “
देश के लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर भारत के प्रधानमंत्री लोकसभा में अपना धन्यवाद भाषण लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष माननीय राहुल गांधी के द्वारा रचित चक्रव्यूह में फंस कर दे नहीं पाये।जननायक राहुल गांधी में समझ तो है l बिना समझ के तो हर बार संसद पर वर्चस्व क़ायम कर
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