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  • पत्रकारों को कोविङ-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल द्वारा प्रदत्त यात्रा रियायतों को पुनः बहाल किया जाए – सांसद नीरज डाँगी

    नई दिल्ली 13 फरवरी। सांसद श्री नीरज डाँगी ने आज राज्यसभा सदन में शून्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढाँचे के चौथे स्तंभ-पत्रकारिता से संबंधित, संवेदनशील एवं जनहित से सीधे जुड़े विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। सांसद श्री नीरज डाँगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल द्वारा पत्रकारों को दी जा


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    By Ravi Kumar Feb 14, 2026
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    नई दिल्ली 13 फरवरी। सांसद श्री नीरज डाँगी ने आज राज्यसभा सदन में शून्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढाँचे के चौथे स्तंभ-पत्रकारिता से संबंधित, संवेदनशील एवं जनहित से सीधे जुड़े विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया।

    सांसद श्री नीरज डाँगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल द्वारा पत्रकारों को दी जा रही यात्रा रियायतें महामारी के दौरान स्थगित की गई थीं, जो उस समय की परिस्थितियों में एक अस्थायी एवं व्यावहारिक निर्णय था। किंतु खेद का विषय है कि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने, सभी आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ सुचारु रूप से प्रारंभ होने तथा अन्य श्रेणियों को दी गई रियायतें पुनः लागू होने के बावजूद पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गई है।

    सांसद श्री डाँगी ने कहा कि पत्रकार केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश के दूर-दराज़, दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आपदाओं, सामाजिक असमानताओं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में भारतीय रेल द्वारा दी जाने वाली यात्रा रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा रही हैं।

    उन्होंने बताया कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित तभी सुनिश्चित हो सकता है जब पत्रकार निर्भय, स्वतंत्र और सुलभ साधनों के साथ कार्य कर सकें।

    सांसद श्री नीरज डाँगी ने बताया कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है और यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं कही जा सकती। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, ग्रामीण एवं क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े संवाददाता इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। लोकतंत्र सशक्त, जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र तब ही रह सकता है जब उसकी आवाज़ निर्भय, स्वतंत्र और निर्बाध हो।

    सांसद श्री नीरज डाँगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल द्वारा पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं स्थायी नीति का निर्माण किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति ना हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ वास्तविक एवं सक्रिय पत्रकारों तक सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुँचे।

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