उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में “द वॉयस ऑफ जस्टिसर जस्टिस गवई स्पीक्स” किताब जारी की। उपराष्ट्रपति ने “द वॉयस ऑफ जस्टिस जस्टिस गवई स्पीक्स” किताब जारी की।
सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस किताब को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक दस्तावेज बताया जो अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और जन-जिम्मेदारी से बनी न्यायिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह किताब संविधानवाद, कानून के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन के बारे में बहुमूल्य जानकारी देती है और भारत में संवैधानिक चर्चा और कानूनी ज्ञान को मजबूत करेगी।
संविधान पर किताब के विचारों का जिक्र करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह भारत के संविधान को सही ढंग से एक जीवंत और विकसित होते दस्तावेज के रूप में पेश करती है, जिसने पिछले 75 वर्षों में निरंतरता और बदलाव, अधिकार और जवाबदेही, तथा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता का आधार बना हुआ है, जबकि संसद की इसमें संशोधन करने की शक्ति देश को बदलते समय की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक शासन को बनाए रखने और कानून के शासन में नागरिकों के विश्वास की रक्षा करने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकार के साथ-साथ संयम भी उतना ही महत्वपूर्ण है, और मजबूत संस्थाएँ तथा न्याय स्वयं संस्थागत ईमानदारी, संवैधानिक अनुशासन, जन-विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से ही कायम रहते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक शासन को आम नागरिकों की आकांक्षाओं और बदलती सामाजिक वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए सम्मान, अवसर और उम्मीद सुनिश्चित करने के लिए हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाना जरूरी है। न्यायपालिका में जस्टिस बी.आर. गवई के योगदान की सराहना करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और न्याय तक पहुँच के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कानूनी बिरादरी के सदस्यों से अपील की कि वे नियमित अंतराल पर सबसे गरीब लोगों का मुफ्त (प्रो बोनो) प्रतिनिधित्व करें, ताकि सभी को न्याय मिल सके।
इस कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस सूर्य कांतय भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जस्टिस विक्रम नाथय भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस बी.आर. गवईय कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष और संपादक, प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमारय प्रकाशक, थॉमसन रॉयटर्स, गौरी शंकर नटेसनय और कानूनी बिरादरी के सदस्य शामिल हुए।
उपराष्ट्रपति भवन में “द वॉयस ऑफ जस्टिसरू जस्टिस गवई स्पीक्स” किताब के विमोचन के अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि जस्टिस बी. आर. गवई जी का न्यायिक सफर संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और न्याय की उपलब्धता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नई किताब जारी की उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में “द वॉयस ऑफ जस्टिसर जस्टिस गवई स्पीक्स” किताब जारी की। उपराष्ट्रपति ने “द वॉयस ऑफ जस्टिस जस्टिस गवई स्पीक्स” किताब जारी की।सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस किताब को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक दस्तावेज बताया जो अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और जन-जिम्मेदारी से बनी न्यायिक सोच
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