भारत के उपराष्ट्रपति, सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली के लाल किला मैदान में ‘लव कुश रामलीला समिति’ द्वारा आयोजित दशहरा समारोह में भाग लिया।
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने दशहरे के पावन अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभु श्री राम का जीवन आज भी लोगों को मर्यादा, त्याग, प्रेम, भाईचारे, माता-पिता के प्रति सम्मान और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण जैसे मूल्यों से प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि यदि हम इन आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं, तो इससे मजबूत परिवारों, एक सौहार्दपूर्ण समाज और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में मदद मिलेगी।
रावण के पुतले दहन का जिक्र करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह अवसर हमें एक गहरा संदेश भी देता है—कि हमें अपने भीतर के ‘रावण’ को खत्म करना चाहिए। इसके लिए हमें अपने अहंकार, क्रोध, लालच, ईर्ष्या और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों पर काबू पाना होगा। उन्होंने लोगों से समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता के बंधन को मजबूत करने की अपील की।
नशीले पदार्थों के सेवन (ड्रग एब्यूज) की चुनौती पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन देश के युवाओं के स्वास्थ्य, उनकी क्षमताओं और उनके भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने युवाओं से नशीले पदार्थों से दूर रहने का आग्रह किया और भारत से इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।










