बिहार की 50 लाख महिलाओं के खाते में मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 26 सितंबर को पांच हजार करोड़ रूपए भेजे जाएंगे। इस योजना के तहत चुनी गई हर एक महिला को 10 हजार रूपए की पहली किस्त मिलेगी। बिहार सरकार ने पिछले दो महीने के भीतर कई घोषनाएं कीं। इनका सालाना बोझ 33 हजार 926 करोड़ होगा। यह अगले साल 2026-27 के बजट में दिखेगा। केवल इस साल यानी 2025-26 के वित्तीय वर्ष के भी आधा बचे होने के कारण यह बोझ 20 हजार करोड़ से कम नहीं होगा। इसकी वजह-घोषणा, मासिक भत्ते, मानदेय, टैबलेट या दूसरे एकमुश्त अनुदान का होना है।
चुनावीं वादो से खजाने पर पड़ने वाले भारी बोझ का बिहार सरकार को अनुमान था। सरकार ने जुलाई से सितंबर तक 16 हजार करोड़ रूपए कर्ज लेने की तैयारी पहले से ही कर ली थी। जो पिछले साल की इस अवधि की तुलना में चार हजार करोड़ ज्यादा है। पहले से किए गए वादों को भीे पूरा करने की चुनौती है। इसलिए सरकार के सीमित संसाधन को देखते हुए आगे भी कर्ज का ही सहारा हाने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बिहार सरकार को हर दिन 63 करोड़ रूपए चुकाना है सूद
2024-25 तक बिहार सरकार 03 लाख 62 हजार 036 करोड़ कर्ज ले चुकी थी । 2025-26 में भी लगभग 44 हजार करोड़ लोन लेने की योजना है। इस तरह वित्तीय वर्ष के अंत तक बिहार के माथे पर कर्ज का यह पहाड़ 04 लाख 06 हजार 470 करोड़ का हो जाने का अनुमान है। कर्ज का सूद इस साल ही 23,013 करोड़ चुकाना है। बिहार सरकार को हर दिन 63 करोड़ रूपए सूद क रूप में चुकाने पड़ेंगे। दो हजार करोड़ तो सूद के रूप मेें केवल सितंबर महीने में चुकाने हैं। इसी तरह कर्ज के मूलधन का 22,280 करोड़ भी बिहार सरकार को इस वित्तीय वर्ष में चुकाना है। इसका कुल अंकगणित यह है कि 45,813 करोड़ साल भर में केवल कर्ज और सूद में ही चले जाएंगे।
इन चुनावी वादों पर अच्छी राशी होनी है खर्च
- मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजनाः-1.06 करोड़ आवेदन, प्रत्येक को 10 हजार की पहली किस्त
कुलः 10 हजार 600 करोड़ - सामाजिक सुरक्षा पेंशनः-400 से बढ़ाकर 1100 रूपए। 1.11 करोड़ लोगों को फायदा। सरकार पर भारः-777 करोड़ मासिक, सलाना-9234 करोड़
- 8053 पंचायतों में विवाह मंडपः- हर विवाह मंडप पर 50 लाख खर्च होंगे। 4260 करोड़ मंजूर
- स्नातक बेरोजगारों को हर महीने एक हजार का भत्ता
2025 मेें 4.30 लाख लोगों ने स्नातक किया । स्नातक बेरोजगारों की संख्या पांच गुनी भी मान ली जाए तो 21.50 लाख लोग बेरोजगार हैं।
खर्च बढ़ाः215 करोड़ मासिक, 2580 करोड़ सालाना - हर परिवार को 120 यूनिट फ्री बिजली। सरकार पर बोझ 3800 करोड़ रूपए
- निबंधित निर्माण श्रमिकों के खाते में 802 करोड़ 46 लाख 45 हजार रूपये भेजे गए
- निबंधित निर्माण श्रमिकों को वस्त्र भत्ता ढ़ाई की जगह 5 हजार मिलेंगे
निबंधित निर्माण श्रमिकों की संख्याः16 लाख 4 हजार 929
खर्च बढ़ाः401 करोड़ 23 लाख सालाना - मिडडे मिल के रसोइयों का मानदेय 1650 से बढ़ाकर 3300 किया
रसोइयों की संख्याः 2,14,510
खर्च बढ़ाः मासिक – 35 करोड़ 39 लाख 41 हजार 500, सालाना-324 करोड़ 73 लाख - आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय 7 हजार से बढ़ाकर 9 हजार किया
आंगनबाड़ी सेविकाओं की संख्या-1,15,900
सरकार पर नया भार: 23 करोड़ 18 लाख, सालाना-278 करोड़ 16 लाख - आशा कार्यकर्ताओं को मानदेय 1000 की जगह 3000 रूपए प्रति माह बढ़ा
आशा कार्यकर्ताओं की संख्याः94,664
बढ़ा खर्च: 18 करोड़ 93 लाख 28 हजार, सालाना-227 करोड़ 18 लाख 76 हजार









