सहमी-सहमी नजर आ रही है सरकार. दुनिया में नेताओं के, बैंकर्स के, राजनीतिक के, सांसदों के, पूर्व प्रधानमंत्रियों के धराधर इस्तीफ़ा और दबाव पर भारत में अमृत काल में कैबिनेट मंत्री का एप्सटीन फाइलों के मेल में नाम और उनकी मुलाकात और एप्सटीन के साथ डिनर पर न्यूज एंकर और चैनल द्वारा उनका और खुद एप्सटीन का भी बचाव।
मंत्री पुरी चैनलों पर जाकर अपना बेटा, नैतिक बचाव करते कह रहे – 3-4 बार एप्सटीन से मिला। उपयोग कौन नहीं जानता था. उसका आपराधिक रिकॉर्ड एक निजी मामला था। मैं डिजिटल इंडिया और भारत के कायाकल्प के लिए सरकार के प्रयासों के लिए उसकी मदद ले रहा था। बस इतनी सी बात. कुछ होता तो बटाटा। अब जबकी 2015-17 के भी ई-मेल की बातें एक सांसद द्वारा जारी की गई हैं, और कांग्रेस और पुरा विपक्ष इस्तिफे की.मांग कर रहा है क्योंकि इस अवधि में पुरी आरआईएस, एक सरकारी थिंक टैंक के चेयरमैन थे तो भारत सरकार को साफ करना चाहिए कि पूरी किसे कहने पर और किस अथॉरिटी से एप्सटीन से बात कर रहे थे.
केन्द्र सरकार चारों तरफ से घिरी हुई है। अमेरिकी दबाव में प्रधानमंत्री पूरी तरह हैं, यह सभी को नजर स्पष्ट आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के मंत्री पुरी ने स्वंय स्वीकार किया कि एप्सटीन के साथ डिनर पर मुलाकात हुई। मोदी के मंत्री ने स्वयं यह स्वीकार किया कि एप्सटीन से 3-4 बार मुलाकात हो चुकी है। देश के गोदी मीडिया ने मंत्री पुरी को पूरी तरह से बचाने में लगा हुआ है। मोदी के इस अमृतकाल में देश अमेरिका के हाथों पूरी तरह गिरवी रख दिया गया है। आखिर अमेरिका के पास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कौन सा राज है, जिस कारण मोदी डोनल ट्रंप की हर गलत बातों को मान रहें है, मोदी देश हित-राष्ट्रहित को दरकिनार कर के अमेरिका का हर बात मान रहे हैं ?








