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  • आरोपों के घेरे में अमिताभ दास

    पूर्व से विवादों में रहे पूर्व आईपीएस अमिताभ दास पून एक बार विवादों में आ गये हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार पर विवादास्पद एवं अमर्यादित टिप्पणी कर सुर्खियों में बने रहना इनकी आदत सी बन गयी है। सरकार से इनकी नाराजगी जग जाहिर है। और हो भी क्यों नहीं। इसी सरकार ने 2018 में इन्हें


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    पूर्व से विवादों में रहे पूर्व आईपीएस अमिताभ दास पून एक बार विवादों में आ गये हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार पर विवादास्पद एवं अमर्यादित टिप्पणी कर सुर्खियों में बने रहना इनकी आदत सी बन गयी है। सरकार से इनकी नाराजगी जग जाहिर है। और हो भी क्यों नहीं। इसी सरकार ने 2018 में इन्हें अयोग्य करार देते हुए इन्हें जबरन रिटायर्ड जो कर दिया था। कहा जाता है कि ये कभी भी अपना एसीआर वरीय पदाधिकारी से नहीं लिखाये, क्योंकि इनके नजर में सभी वरीय पदाधिकारी चोर हैं। अब मानसिक दिवालियापन ना कहा जाए तो और क्या ?

    खुद यौन शोषण के आरोपी रहे हैं अमिताभ दास हाल ही में कुछ मीडिया पर अमिताभ दास के द्वारा नीट मामले में सरकार पर बलात्कारियों का संरक्षण देने का आरोप लगाया है। जबकि अमिताभ दास खुद यौन शोषण के आरोपी रहे हैं। शबनम केस 2006 में एक महिला ने (जो कि एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की बेटी बताई गई) अमिताभ कुमार दास पर इनके यौन शोषण करने और शादी का झूठा वादा करने का आरोप लगाया। वर्ष 2006 अमिताभ दास जो उस वक्त जमुई में बीएमपी-11 कमांडेट थे। उन्होंने उनका 8-9 साल तक यौन शोषण किया और शादी का झूठा वादा भी किया। महिला का दावा था कि उन्होंने कई वर्षों तक उनसे संपर्क रखा और शादी का वादा किया, लेकिन बाद में उन्होंने ऐसा नहीं किया। अतः मीडिया कर्मियों को चाहिए कि पहले शबनम सिन्हा को ढूंढकर इनका बयान ले फिर पता चलेगा कि अमिताभ दास हैं कौन ?

    चर्चा यह भी है कि एसपी देवघर के रूप में अपने पदस्थापन के दौरान एक विदेशी महिला के साथ छेड़-छाड का आरोप भी लगा है। दूसरों के डीएनए टेस्ट की मांग करने वाले अमिताभ दास का चरित्र खुद भी ऐसा ही रहा है।

    सरकार से अपनी नाराजगी में ये इतने गिर जाएंगे किसी ने सोचा नहीं था। ये अपने बयानों से जनता को सरकार के प्रति उकसाना चाहते हैं। झूठे, विवादास्पद एवं अमर्यादित बयान देकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहते हैं। यही कारण है कि ये रिटायर्ड होने के बावजूद आईपीएस लेटर पैड और गर्वनमेंट इम्बेलम इस्तेमाल कर रहे हैं। सेवानिवृत्त के बाद भी इनके द्वारा अपने निजी लेटर पैड पर भारत सरकार का चिह्न का उपयोग किया जा रहा है जो मुख्य रूप से ‘भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005 और स्टेट एम्बलेम ऑफ इंडिया (रेगुलेशन ऑफ यूज) रूल्स, 2007 के तहत दंडनीय अपराध है। साथ ही एक जनतांत्रिक एवं चुने हुए सरकार पर ऐसे अपुष्ट खबर फैलाकर राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए इन्हें एनएसए एक्ट लगना चाहिए।

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