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  • राहुल से डरे मोदी कार्रवाई से भागे

    देश के संसद में कार्रवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से डरे सत्ता पक्ष के लोग नजर आए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित सत्ता पक्ष के लोग राहुल गांधी से डरे-डरे नजर आए। केन्द्र की कमजोर मोदी सरकार आज विपक्ष के सवालों के जबाव देने से डरी हुई है।पिछले कुछ दिनों


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    देश के संसद में कार्रवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से डरे सत्ता पक्ष के लोग नजर आए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित सत्ता पक्ष के लोग राहुल गांधी से डरे-डरे नजर आए। केन्द्र की कमजोर मोदी सरकार आज विपक्ष के सवालों के जबाव देने से डरी हुई है।
    पिछले कुछ दिनों में लोकसभा की कार्यवाईयों और घटनाएं क्रम पहली बार सरकार घिरी हुई दिखी। राहुल गांधी ने नरवणे की किताब से बजट पर अपना पक्ष रखते हुए सरकार को अडानी-अंबानी से लेकर, ट्रेड डील और एपस्टीन फाइलें तक जिस तरह से सरकार और कुर्सी के सामने डट कर खड़े हो गए, यह एक ऐतिहासिक घटना है। चाहे स्पीकर के चैंबर का सदस्यों के टकराव का वीडियो हो, संसदीय कार्य मंत्री रिजुजू का कांग्रेस के महिला सांसदों का सदन में सत्ता पक्ष की सीट के सामने प्रदर्शन वीडियो जारी करने का मामला को या फिर लोकसभा अध्यक्ष का घोषणा करना कि उन्होंने पीएम को सदन में आने से माना किया, किस के डर से, स्पीकर पर विपक्ष का विश्वास प्रस्ताव हो या फिर अब सरकार के विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव की जगह भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर ठोस प्रस्ताव लाने का मुद्दा हो, सरकार लगातार बैकफुट पर दिख रही है। पीएम मोदी और अमित शाह, राजनाथ सिंह – सरकार के शीर्ष नेता सदन में नहीं दिख रहे। उनकी जगह सरकार का नेतृत्व करते दिख रहे हैं, रिजुजू और साथ में निशिकांत दुबे एवं गिरिराज सिंह सर्खे नेता। इस प्रस्ताव में दुबे ने मान किया है कि राहुल गांधी विदेश में जाकर भारत के खिलाफ बोलते हैं। वो सोरोस जैसे फाउंडेशन चलाने वालों के साथ मिलकर देश के खिलाफ करते हैं, राहुल एक ठग गैंग के लीडर हैं, उन्होंने तथ्यों से बात करके सरकार और उनके नेताओं को बदनाम किया है, वो सुप्रीम कोर्ट और इलेक्शन कमीशन जैसी सबसे बड़ी संस्थाओं के खिलाफ बोलते हैं इसलिए उन्हें सदन से निष्कासित किया जाए और भविष्य में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आयोग घोषित किया जाए। अब अगर यह मोशन चेयर द्वारा स्वीकृत होता है तो इस पर बहस भी होगी और दुबे को अपने चार्ज को ऑथेंटिकेट भी करना होगा। भारतीय राजनीति के इस चक्रव्यूह को देखना मुश्किल हो गया है।

     
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