काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष के अवसर पर साहित्य कला परिषद (दिल्ली सरकार) एवं सभ्यता अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति “काकोरी क्रांति गाथा” का प्रभावशाली मंचन 15 मार्च 2026 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली में किया गया।
कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से बड़ी संख्या में बौद्धिक वर्ग, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और सांस्कृतिक हस्तियाँ उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में पूर्वमंत्री, गुजरात सरकार नरेश रावल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य वागीश पाठक, आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह शामिल रहे।
नाटक ने दिखाया स्वतंत्रता संग्राम का व्यापक परिप्रेक्ष्य
नाटक केवल काकोरी कांड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें
तिलका मांझी, रामजीगोंड, डॉ. केशव बलिराम हेडगे वार जैसे अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के संघर्ष को भी दर्शाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम अनेक धाराओं और बलिदानों का परिणाम था।
सभ्यता अध्ययन केंद्र के उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के बारे में जो कथा लंबे समय तक प्रस्तुत की जाती रही है, वह आंशिक सत्य और एक प्रकार की धारणा का परिणाम है। यह नाट्य प्रस्तुति उस व्यापक ऐतिहासिक वास्तविकता को सामने लाने का प्रयास है, जिसे देश के युवाओं को जानना आवश्यक है।
नाटक का आलेख रविशंकर ने गहन शोध के आधार पर लिखा और प्रियंका शर्मा ने उसका सशक्त निर्देशन किया। “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” जैसे क्रांतिकारी गीतों और प्रभावी मंचन ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।









