पंजाब मूल की सुश्री शिवाली चैटली इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। वर्तमान में वह ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य के ग्रेटर बेंडिगो शहर की निर्वाचित काउंसलर हैं। ग्रेटर बेंडिगो, मेलबर्न शहर से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित है। इस हफ्ते दिल्ली में डायस्पोरा फाउंडेशन द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विराट वैभव के वरिष्ठ सहयोगी वी एन झा ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर बात की। यहां पेश हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
1) आप ऑस्ट्रेलिया कब गईं और वहां बसने का निर्णय क्यों लिया?
मैं दो दशक से भी अधिक समय पहले एक बेहतर भविष्य और नए अवसरों के सपने के साथ ऑस्ट्रेलिया गई थी। ऑस्ट्रेलिया ने मुझे एक निष्पक्ष व्यवस्था, विविधता के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत व व्यावसायिक विकास का अवसर दिया। धीरे-धीरे वह केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि मेरा घर बन गया क्योंकि वहां के समुदाय और मूल्यों से मेरा गहरा जुड़ाव हो गया।
2) ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा पूरी करने के बाद आपने कौन-कौन से व्यवसाय और कार्य शुरू किए?
शिक्षा पूरी करने के बाद मैंने आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से सीधे कार्यक्षेत्र में कदम रखा। मैंने अपना व्यवसाय शुरू किया, जिसे पिछले 26 वर्षों से सफलतापूर्वक चला रही हूं। इसमें फ्यूल स्टेशनों की श्रृंखला का संचालन भी शामिल है। शुरुआती समय संघर्ष, सीख और निरंतर मेहनत का था। इसी यात्रा ने मुझे लोगों, व्यवसाय और समाज की आवश्यकताओं को समझने का अनुभव दिया।
3) आपको ग्रेटर बेंडिगो सिटी की काउंसलर का चुनाव लड़ने की प्रेरणा कहां से मिली?
मेरे भीतर हमेशा समाज को कुछ लौटाने की भावना रही है। वर्षों तक समुदाय के बीच रहने और काम करने के बाद मैंने महसूस किया कि कई लोगों की आवाज सही मंच तक नहीं पहुंच पाती। मैं उन लोगों की प्रतिनिधि बनना चाहती थी जो अक्सर खुद को अनसुना महसूस करते हैं। कर्म और सेवा में मेरी गहरी आस्था ने मुझे यह कदम उठाने की प्रेरणा दी।
4) मेलबर्न से लगभग 150 किलोमीटर दूर एक्सडेल वार्ड के लोगों से आपका जुड़ाव किस प्रकार बना रहता है?
लोगों से जुड़ाव का सबसे बड़ा माध्यम है- उनके बीच उपस्थित रहना। मैं नियमित रूप से स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेती हूं, सामुदायिक पहलों का समर्थन करती हूं और लोगों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनती हूं। चाहे ग्रामीण क्षेत्र की समस्याएं हों, आधारभूत सुविधाओं का मुद्दा हो या सांस्कृतिक समावेशन की बात, मैं सुनिश्चित करती हूं कि हर व्यक्ति की आवाज सुनी जाए। मेलबर्न से दूरी हमारी पहचान को और मजबूत बनाती है।
5) जीवन में आपको सबसे अधिक प्रेरणा किससे मिलती है?
मुझे उद्देश्यपूर्ण जीवन, लोगों की सेवा और कर्म में विश्वास से प्रेरणा मिलती है। मेरा मानना है कि हम दुनिया को जो देते हैं, वही हमारे पास लौटकर आता है। एक व्यवसायी, काउंसलर और समाजसेवी के रूप में मेरी यात्रा ने मुझे जमीन से जोड़ रखा है। मैं केवल इरादों में नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम देने में विश्वास रखती हूं। लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
6) ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक समाज में भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका को आप कैसे देखती हैं?
भारतीय प्रवासी समुदाय आज ऑस्ट्रेलिया के सबसे प्रभावशाली और सक्रिय समुदायों में से एक बन चुका है। समय के साथ भारतीय समुदाय ने केवल बसने और खुद को स्थापित करने तक सीमित न रहकर नेतृत्व, उद्यमिता और पेशेवर उत्कृष्टता के क्षेत्र में भी मजबूत पहचान बनाई है। आज भारतीय मूल के लोग व्यवसाय, राजनीति, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और आधुनिक बहुसांस्कृतिक ऑस्ट्रेलिया के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
7) भारत-ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौते के बाद व्यापारिक संभावनाओं में क्या बदलाव आया है?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने दोनों देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं। इससे व्यापारिक बाधाएं कम हुई हैं और शिक्षा, कृषि, तकनीक तथा छोटे व्यवसायों में सहयोग बढ़ा है। उद्यमियों और निवेशकों के लिए यह समझौता नए नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाने का एक मजबूत मंच साबित हो रहा है।
8) भारत यात्रा आपके अपनी जड़ों से गहरे लगाव को दर्शाती है। आप इसे और कैसे मजबूत बनाना चाहती हैं?
अपनी जड़ों से जुड़े रहना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मैं भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक, व्यावसायिक और सामुदायिक संबंधों को और मजबूत करना चाहती हूं। सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विभिन्न पहलों के माध्यम से मैं दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाना चाहती हूं।
9) मेलबर्न का इंडियन फिल्म फेस्टिवल भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को किस प्रकार मजबूत करता है?
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह भारतीय सिनेमा, संस्कृति और कहानियों को ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों तक पहुंचाता है। इसके माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ, सांस्कृतिक जुड़ाव और संबंध और अधिक मजबूत होते हैं।
सुश्री शिवाली चैटली आज भारतीय प्रवासी समुदाय की उस नई पहचान का प्रतीक हैं, जिसने मेहनत, सेवा और नेतृत्व के बल पर ऑस्ट्रेलिया में अपनी अलग छाप छोड़ी है।










