भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने आई थी और फिर पूरे देश में अपना साम्राज्य खड़ा कर भारत को गुलाम बना लिया था। माना यह जा रहा है कि कुछ ऐसी ही स्थिति अडाणी समूह की है। अगर यह कहा जाए कि बिहार के पानी पर भी अडाणी का एक छत्र राज कायम हो जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अडाणी की बिहार यात्रा और यहां विभिन्न क्षेत्रों में भारी पूंजी निवेश करने की घोषणा से क्या बिहार जैसे पिछड़े और बीमारू राज्य की सेहत सुधरेगी? क्या बेरोजगारों का पलायन रूकेगा? या सिर्फ अडाणी या सरकारों का ही भला होगा? एक रिपोर्ट के मुताबिक भागलपुर जिले के पीरपैंती में अडानी समूह को पावर प्लांट के लिए लगभग 1,050 एकड़ जमीन 1 रुपये प्रति वर्ष की लीज दर पर 33 वर्षों के लिए दी गई है अडाणी की बिहार यात्रा के बाद कुछ ऐसे हीं सवाल कौंध रहे हैं। सवाल तो यह भी है कि जनता की कड़ोरो रुपये मूल्य की जमीन कौड़ियों के भाव सरकार अडाणी को देने पर क्यों आमादा है? इसका समुचित जवाब सरकार जनता को क्यों नहीं दे रही है।
कौड़ियों के भाव बिहार में अडाणी समूह को दी जा रही जमीन
अपनी बिहार यात्रा के गौतम अडाणी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिले और तामझाम के साथ सारण की यात्रा की। उन्होंने बिहार में अगले दो-तीन वर्षों में 50-60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश बिजली, सड़क, लॉजिस्टिक्स और सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में होगा। इसके पहले से बिहार के पीरपैंती (भागलपुर) में गौतम अडानी ने 27,000 करोड़ रुपये की लागत वाली 2400 मेगावाट की अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल विद्युत परियोजना का दौरा कर उसकी प्रगति की समीक्षा की। इस विशाल तापीय परियोजना से क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति को मजबूती मिलने और बिहार की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने की उम्मीद जताई जा रही है।
दूसरी ओर, पीरपैंती में प्रस्तावित अडानी बिजली परियोजना का विरोध मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण में अनियमितताओं, कौड़ियों के भाव लीज़ पर ज़मीन देने के आरोपों और स्थानीय लोगों के विस्थापन को लेकर हो रहा है। वहां के स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार उनकी न तो उनकी बातें सुन रही है और न तो भूमि अधिग्रहण से संबंधित समस्याओं का उचित समाधान हो रहा है। बहरहाल हाल में हुई अडाणी की बिहार यात्रा ने भागलपुर, पीरपैंती के लोगों का जख्म एक बार फिर से हरा कर दिया है। लोगों के बीच यह सवाल ज्वलंत मुद्दा बनने लगा है कि क्या आडाणी को बिहार में नये प्रोजेक्ट के लिए दी जाने वाली भूमि अधिग्रहण का हश्र भी पीरपैंती भूमि अधिग्रहण जैसा ही होगा? अडाणी के प्रोजेक्ट से बिहारियों का भला होगा या केंद्र -राज्य सरकार और नेता सिर्फ अपना हित साधने के साथ अडाणी हित का रास्ता खोलेगी?










