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  • दिल्ली के लाल किला कार धमाके से उठे कई सवाल: मौत, मातम, और सरकारी तंत्र की अनदेखी

    रिपोर्ट – विष्णु मिश्रा 10 नवंबर 2025 की पुरानी दिल्ली के लाल किला इलाके में शाम की रौनक चरम पर थी — भीड़-भाड़ और ट्रैफिक आम दिनों की तरह थे। फिर शाम 6:47 बजे एक जोरदार धमाके की आवाज़ ने सब कुछ बदल दिया। यह धमाका एक Hyundai i20 कार में हुआ। धमाके की गूँज


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    रिपोर्ट – विष्णु मिश्रा

    10 नवंबर 2025 की पुरानी दिल्ली के लाल किला इलाके में शाम की रौनक चरम पर थी — भीड़-भाड़ और ट्रैफिक आम दिनों की तरह थे। फिर शाम 6:47 बजे एक जोरदार धमाके की आवाज़ ने सब कुछ बदल दिया। यह धमाका एक Hyundai i20 कार में हुआ। धमाके की गूँज इतनी तेज़ थी कि पूरे पुरानी दिल्ली में सुनी गई।

    नूतन चर्चा से बात करते हुए हिंदुस्तान लाइव के पत्रकार फ़रहान ने बताया कि जब धमाका हुआ वे उस समय दरीयागंज में मौजूद थे और धमाके की गूँज उन्हें सुनाई दी। फ़रहान बताते हैं, “जब हम घटना स्थल पर पहुँचे, वहाँ का नज़ारा भयावह था — चारों ओर शरीर के टुकड़े और खून की बूँदें फ़ैली हुई थीं।”

    नूतन चर्चा से बात करते हुए ऑटो चालक अब्दुल आज़ीज़ ने बताया कि हादसा होने पर वे लाल किला थाने के पास, घटना स्थल से लगभग 1 किमी दूर थे। उस समय वहाँ 3–4 पुलिसकर्मी पहले से मौजूद थे जिन्होंने मौके पर बैरिकेडिंग शुरू कर दी थी। कुछ देर बाद दिल्ली फायर सर्विस की करीब 20 दमकल गाड़ियाँ, NSG, एंटी-टेरर स्क्वॉड और दिल्ली पुलिस वहां पहुँची और स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। हमले के तुरंत बाद सभी घायलों और मृतकों को जन लोक नायक अस्पताल में लाया गया। सरकार की ओर से मृतकों की संख्या 8 और घायलों की संख्या 28 बताई गई, पर कुछ मीडिया स्रोतों के अनुसार मृतकों की संख्या 16 और घायलों की संख्या 35 तक पहुँचती है।

    यह बात ध्यान रखने योग्य है कि यह विस्फोट जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा हरियाणा के फरीदाबाद में दो आवासीय भवनों से लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किये जाने के कुछ ही घंटों बाद हुआ। उस ज़ब्ती में 350 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल था — एक सामान्य उर्वरक जो घातक बम में बदल सकता है — और यह सामग्री जम्मू-कश्मीर के एक गिरफ्तार डॉक्टर आदिल राथर से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर ज़ब्त की गई थी।

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    अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी भी सुरक्षा एजेंसी ने इस धमाके को आतंकी घटना होने की पुष्टि नहीं की है; मामले की जांच जारी है और अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि यह आतंकी हमला था, CNG फटने के कारण हुआ, या किसी अन्य वजह से। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने रेड फोर्ट कार धमाके के बाद UAPA और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। 11 नवंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने सभी सुरक्षा एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक बुलायी है।

    रात 10:30 बजे गृह मंत्री अमित शाह जन लोक नायक अस्पताल पहुँचे और घायलों से मिले; इसके बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घायल मरीजों से मिलने अस्पताल आईं। इन सबके बीच अस्पताल के बाहर अव्यवस्था का नज़ारा देखने को मिला — मृतकों व घायलों के परिजनों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। लोग बार-बार कोशिश कर रहे थे कि वे एक बार अपने रिश्तेदारों की हालत जान सकें। नूतन चर्चा ने भुसरा से भी बात की; भुसरा के पति धमाके में घायल हुए थे। भुसरा ने बताया कि उन्हें अपने पति से मिलने नहीं दिया जा रहा और वह शाम 8 बजे से अस्पताल के बाहर इंतज़ार कर रही हैं। ऐसे कई लोग थे जो अपने घायलों और मृतक परिजनों को देखना चाहते थे और वे दिल्ली पुलिस से आग्रह कर रहे थे जो उस वक्त अस्पताल की सुरक्षा में तैनात थी। इस बीच परिजनों और पुलिस के बीच बहस हुई और लगभग रात 12:30 बजे के आसपास परिजनों को अंदर जाने की अनुमति दी गयी।

    नूतन चर्चा से बात करने वाले कुछ परिजनों ने बताया कि उनके रिश्तेदार लापता हैं। उदाहरण के तौर पर आतिफ ने बताया कि उनके दो भाई — अमन और ज़ोरान — हादसे के समय वहीँ मौजूद थे। अमन और ज़ोरान के परिवार को लाल किला पुलिस की तरफ से फोन आया कि उनका बेटा/भाई जन लोक नायक अस्पताल में लाया गया है; जब वे अस्पताल पहुँचे और विक्टिम लिस्ट देखी तो अमन का नाम था पर ज़ोरान का नाम नहीं था। पूरा परिवार रात भर ज़ोरान को दिल्ली के हर अस्पताल में ढूँढता रहा, यह उम्मीद करते हुए कि शायद उन्हें किसी और अस्पताल में ले जाया गया हो, पर कोई खबर नहीं मिली। ऐसे 5–6 परिवारों के मामले मिले जिनको लाल किला थाने से कॉल आया पर अस्पताल पहुँचने पर वे अपने रिश्तेदारों को विक्टिम लिस्ट में नहीं पाए। सरकार की ओर से यह एक बड़ी लापरवाही मानी गई कि घायलों और मृतकों के परिजनों को घंटों भटकना पड़ा सिर्फ अपनों की एक खबर जानने के लिए।

    लापरवाही यहीं नहीं रुकी — जब मृतकों के परिजन मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद मेडिकल कॉलेज के मॉर्च्यूरी पहुँचे तो अस्पताल की ओर से उन्हें एम्बुलेंस उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया। एक मृतक मोहसिन, जिनका परिवार आसफ अली रोड में रहता है, उन्हें भी कोई सरकारी एम्बुलेंस नहीं दी गई और अस्पताल ने उन्हें निजी एम्बुलेंस लेने को कहा। जब वे अस्पताल के बाहर निजी एम्बुलेंस के पास पहुँचे तो उनसे 4 हज़ार रुपये माँगे गए — सिर्फ 1 किमी के लिए। ऐसी संवेदनशील परिस्थिति में बहुत से मृतकों के परिजन, जिनमें अधिकतर निम्न-आय परिवार थे, निजी एम्बुलेंस के भरोसे छोड़ दिये गये। अमरोहा के मृतक अशोक कुमार के परिवार को भी निजी एम्बुलेंस लेना पड़ा — अस्पताल से कोई एम्बुलेंस नहीं मिली और निजी एम्बुलेंस वालों ने उनसे 15 हज़ार रुपये तक मांग लिए। जब इन आरोपों की मीडिया में खबर चली तो मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद मेडिकल कॉलेज ने कहा कि वे एम्बुलेंस की व्यवस्था करेंगे या फिर निजी एम्बुलेंस के खर्च का भुगतान करेंगे।

    यह विस्फोट केवल सरकार की सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर नहीं करता, बल्कि इस हादसे ने यह भी दिखा दिया कि इतनी भयानक घटना के बाद भी सरकार पीड़ितों के परिजनों की सहायता नहीं कर पाई — न तो सरकारी प्रतिनिधि अस्पताल के बाहर दिखे और न ही शवगृह के पास।

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    Abhishek Kumar is the editor of Nutan Charcha News. Who has been working continuously in journalism for the last many years? Abhishek Kumar has worked in Doordarshan News, Radio TV News and Akash Vani Patna. I am currently publishing my news magazine since 2004 which is internationally famous in the field of politics.
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