राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार की सरकार है। भाजपा सरकार ने गांवों में प्रति परिवार सालाना न्यूनतम 1200 टैक्स वसूलने का काम शुरू कर दिया है। 16 वें वित्त आयोग के नए निर्देशों के तहत गांवों में प्रति परिवार सालाना न्यूनतम 1200 टैक्स (रोशनी, सफाई, पानी आदि पर) वसूलने का जो फरमान जारी हुआ है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता हैः
सरकार ने फरमान जारी क्या अब हमारे चुने हुए सरपंच वही काम करेंगे जो अंग्रेजी हुकूमत में वसूली करने वाले करते थे? क्या पहले के दौर में अंग्रेजों के लिए लगान वसूलने वाले तथाकथित राजा, साहूकार या चैधरी की भूमिका में अब हमारे ग्राम पंचायत प्रतिनिधि नजर आएंगे? टारगेट पूरा न होने पर विकास बजट में 20 प्रतिशत की कटौती का डर दिखाकर, क्या हमारी पंचायतों को मजबूरन वसूली एजेंट नहीं बनाया जा रहा है?
एक तरफ देश का आम नागरिक और किसान पहले से ही महंगाई और अप्रत्यक्ष करों जीएसटी के भारी बोझ तले दबा है। और ग्रामीण समाज के मेहनत के लूट पहले से ही बहुत हो रही हैं। दूसरी तरफ जनकल्याण के नाम पर यह नया आर्थिक प्रहार किया जा रहा है?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीतियां जनता की सहूलियत के लिए होनी चाहिए, न कि औपनिवेशिक दौर की तरह दंडात्मक सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इन सवालों पर आपकी क्या राय है? क्या पंचायतों को वसूली का माध्यम बनाना सही है?
अब गांवों में प्रति परिवार सालाना 1200 रुपए टैक्स लेने की तैयारी अब गांवों में प्रति परिवार सालाना 1200 रुपए टैक्स लेने की तैयारी ह।14 हजार 403 ग्राम पंचायतों में 5 करोड़ की आबादी इस दायरे में आएंगी। नए नियम 16वें वित्त आयोग ने गांवों के विकास के लिए मिलने वाले फंड को लेकर लागू किए। अब जो पंचायतें अपने स्तर पर टैक्स और यूजर चार्ज वसूल कर खुद की कमाई नहीं बढ़ाएंगी। खुद की कमाई नहीं बढ़ा पाने वाली पंचायत की परफॉर्मेंस ग्रांट रोक दी जाएगी। नए नियमों की जिला परिषद सीईओ, पंचायत समितियों के बीडीओ को गाइडलाइन भेजी जा रही है।
उधर पंचायत समितियों को भी फंड तब मिलेगा जब ग्राम पंचायतें पात्र होगी। इलाके की कम से कम 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतें ग्रांट के लिए पात्र हो जाएंगी। यानी की पात्र नहीं होने पर ग्राम पंचायतों की ग्रांट में 20 प्रतिशत कटौती का प्रावधान होगा। गांवों में आवासीय व्यावसायिक भवनों पर लगने वाला टैक्स,सार्वजनिक स्ट्रीट लाइट, सफाई और कचरा प्रबंधन के नाम पर लगने वाला टैक्स शामिल होगा। मेलों, हाट-बाजारों,प्रदर्शनियों आदि पर लगने वाले स्थानीय टैक्स, यूजर चार्ज शामिल है।









