• National
  • “जल सुरक्षा से ही जन सुरक्षा, राष्ट्र सुरक्षा सुनिश्चित होगी” – उपराष्ट्रपति

    उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत मंडपम में 9 वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि जल संसाधनों के समझदारी भरे इस्तेमाल, संरक्षण और एकीकृत प्रबंधन पर जोर दिया। “जल सुरक्षा से ही जन सुरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा सुनिश्चित होगी”।उपराष्ट्रपति ने पानी बचाने के छोटे-छोटे कदम मानवता और दुनिया के


    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत मंडपम में 9 वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि जल संसाधनों के समझदारी भरे इस्तेमाल, संरक्षण और एकीकृत प्रबंधन पर जोर दिया। “जल सुरक्षा से ही जन सुरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा सुनिश्चित होगी”।
    उपराष्ट्रपति ने पानी बचाने के छोटे-छोटे कदम मानवता और दुनिया के हित में हो सकते हैं। सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जल जीवन और सभ्यताओं का आधार है और उन्होंने इसके समझदारी भरे इस्तेमाल, संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
    तमिलनाडु में अपने बचपन के अनुभवों को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पानी की कमी देखी है और लोगों तक पीने का पानी पहुँचाने के महत्व को समझा है। उन्होंने कहा, मानवता और दुनिया के लिए पानी बचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    उपराष्ट्रपति ने याद किया कि दो दशक से भी पहले, उन्होंने तमिलनाडु में 19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा की थी, जिसका एक उद्देश्य नदियों को आपस में जोड़ने, जल संरक्षण और जल संसाधनों के उचित प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करना था। उन्होंने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने से उन स्थितियों से निपटने में मदद मिल सकती है जहाँ कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आती है और अन्य क्षेत्रों में सूखा पड़ता है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि नदियों के साथ भारत के सभ्यतागत जुड़ाव पर जोर देते हुए, भारतीय समुदायों ने सदियों से पानी के संरक्षण, साझा करने और प्रबंधन के लिए समृद्ध परंपराएँ और तौर-तरीके विकसित किए हैं। उन्होंने कहा, हमारी पारंपरिक समझ आज की जल संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमूल्य सीख देती है।
    उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत के पास दुनिया के कुल भू-भाग का लगभग 2.4 प्रतिशत हिस्सा और कुल आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि उसके पास वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा ही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की पानी की जरूरतों की तुलना उन देशों से नहीं की जा सकती जहाँ पानी की उपलब्धता अधिक है और आबादी कम है।
    उन्होंने नागरिकों से अपने दैनिक जीवन में पानी बचाने के सरल तरीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, हम दो बाल्टी या बीस बाल्टी पानी से नहा सकते हैं। चुनाव हमारा है। ब्रश करते समय हम नल बंद कर सकते हैं। ये छोटी-छोटी बातें लग सकती हैं, लेकिन इन्हीं छोटे-छोटे कामों में मानवता और दुनिया का हित निहित है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से हो रहे शहरीकरण और आबादी बढ़ने से पानी का प्रबंधन और भी मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने नदी-बेसिन प्रबंधन, भूजल को फिर से भरने, बारिश के पानी को इकट्ठा करने और बेहतर सिंचाई जैसे तरीकों को मिलाकर एक साथ काम करने की जरूरत पर जोर दिया।
    उपराष्ट्रपति ने पानी के बंटवारे से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए राज्यों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि पानी के बंटवारे के लिए राज्यों के बीच 10 समझौते एमओयू हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार, जल शक्ति मंत्रालय और इसमें शामिल राज्यों की कोशिशों की तारीफ की, जो मिल-जुलकर समाधान निकालने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर छह राज्यों के बीच हुए किशाऊ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट समझौते का जिक्र किया, जो राज्यों के बीच सहयोग का एक अहम उदाहरण है।
    सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, पानी का बेहतर और टिकाऊ प्रबंधन बहुत जरूरी होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संचय जन भागीदारी के आह्वान को याद किया और नागरिकों से पानी बचाने को एक जन-आंदोलन बनाने की अपील की।
    उन्होंने पानी के इस्तेमाल में ज्यादा दक्षता, रीसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया, खासकर खेती में पानी की भारी मांग और उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए। उन्होंने पानी के प्रबंधन के तरीके को बदलने की बात कही – यानी सिर्फ समस्या आने पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, पहले से अनुमान लगाने और टेक्नोलॉजी पर आधारित प्रबंधन अपनाने की जरूरत है।
    कई पक्षों और कई पहलुओं को शामिल करने वाले नजरिए की वकालत करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि पानी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कोई एक संस्था, सेक्टर या राज्य अकेले नहीं कर सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक-2026 में होने वाली चर्चाओं से जलवायु-अनुकूल और एकीकृत जल प्रबंधन के लिए नए तकनीकी, नीतिगत, सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय तरीके सामने आएंगे।
    सभी प्रतिभागियों से ज्ञान साझा करने, साझेदारी बनाने और पानी बचाने व संरक्षित करने का संकल्प लेने का आग्रह करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा, जल सुरक्षा से ही जन सुरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
    इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने सस्टेनेबल अर्बन रिवर मैनेजमेंट फ्रेमवर्क और एआई एमएल -आधारित एकीकृत जलाशय तलछट प्रबंधन की शुरुआत की। ये कदम टेक्नोलॉजी-आधारित और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन की दिशा में अहम हैं।
    इस कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और राज भूषण चैधरी, तथा जल शक्ति मंत्रालय की सचिव श्रीमती… इस मौके पर अर्चना वर्मा, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष अशोक मीणा, अनुपम प्रसाद और भारत व विदेशों से आए प्रतिनिधि और विशेषज्ञ मौजूद थे।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    प्रतिमाह ₹.199/ - सहयोग कर नूतन चर्चा को आजद रखिये. हम आजाद है तो आवाज भी बुलंद और आजाद रहेगी . सारथी बनिए और हमें रफ़्तार दीजिए। सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    Related Stories

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement