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  • रक्सौल से काठमांडू मात्र 2 घंटे में!

    भारत और नेपाल के बीच बहुप्रतीक्षित रक्सौल काठमांडू रेलवे परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीदें तेज हो गई हैं. नेपाल सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलते ही इस अंतरराष्ट्रीय रेल प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की तैयारी है. परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट पहले ही नेपाल को सौंप दी गई है.आरआईटीईएस ने तैयार की डीपीआर भारतीय


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    By Ravi Kumar Mar 31, 2026
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    भारत और नेपाल के बीच बहुप्रतीक्षित रक्सौल काठमांडू रेलवे परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीदें तेज हो गई हैं. नेपाल सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलते ही इस अंतरराष्ट्रीय रेल प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की तैयारी है. परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट पहले ही नेपाल को सौंप दी गई है.
    आरआईटीईएस ने तैयार की डीपीआर भारतीय रेल मंत्रालय की एजेंसी लिमिटेड ने इस परियोजना का सर्वे और डीपीआर तैयार किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, रक्सौल से काठमांडू तक रेल लाइन की कुल लंबाई करीब 136 किलोमीटर होगी.
    60-70 हजार करोड़ की लागत, पहाड़ों में बनेंगी सुरंगें
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत 60 से 70 हजार करोड़ रुपये के बीच बताई गई है. नेपाल के पहाड़ी इलाकों को देखते हुए 39 सुरंगें, 41 बड़े पुल, 259 छोटे पुल, 32 रोड ओवरब्रिज, 53 अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है.
    दिल्ली से काठमांडू तक रेल कनेक्टिविटी का सपना

    nepal kathmandu


    इस रेल प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ रक्सौल और काठमांडू को जोड़ना नहीं, बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली को काठमांडू से सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ना है. इस परियोजना को लेकर साल 2016 में भारत और नेपाल के बीच समझौता हुआ था, जब नेपाल में के.पी शर्मा ओली की सरकार थी.

    13 स्टेशन होंगे विकसित
    रक्सौल से काठमांडू के बीच कुल 13 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें प्रमुख हैं.
    रक्सौल, वीरगंज, बगही, पिपरा, डुमरवाना, चंद्रपुर, शिखरपुर, सिसनेरी, काठमांडू।
    यह रेलवे लाइन दोनों देशों के बीच यात्री और माल परिवहन को नया आयाम देगी. 6 घंटे का सफर सिमट कर 2 से 2.5 घंटे
    फिलहाल रक्सौल से काठमांडू तक बस या निजी वाहन से करीब 6 घंटे लगते हैं. रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रा का समय 2 से 2.5 घंटे हो जाएगा. वहीं संभावित किराया 200 से 300 होने की उम्मीद है. यानी यात्रा तेज, सस्ती और आरामदायक हो जाएगी.

    व्यापार को मिलेगा बड़ा बूस्ट
    अभी रक्सौल से करीब 6 किमी दूर नेपाल के वीरगंज स्थित सिरिसिया ड्राई पोर्ट तक मालगाड़ियां चलती हैं, जहां से कोलकाता, विशाखापट्टनम और गुजरात जैसे इलाकों से सामान पहुंचता है. नई रेल लाइन बनने के बाद भारत-नेपाल के बीच व्यापार और भी तेज होगा.
    सांसद संजय जायसवाल का बयान
    पश्चिम चंपारण के सांसद संजय जायसवाल ने बताया कि क्च्त् नेपाल सरकार को सौंप दी गई है और दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल में नई सरकार बनने के बाद इस परियोजना को जल्द मंजूरी मिल सकती है.

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