भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कहा कि लोकतंत्र तब फलते-फूलते हैं जब प्रेस तथ्यों का सम्मान करते हुए, विश्वसनीयता बनाए रखते हुए और उच्च पेशेवर मानकों का पालन करते हुए जानकारी देता है, सवाल पूछता है और जानकारीपूर्ण सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी तभी सार्थक होती है जब उसका इस्तेमाल साहस और जिम्मेदारी के साथ किया जाए।
नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ऑर्गनाइजर वीकली के 80वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस प्रकाशन की 80 साल की यात्रा को निरंतरता, मजबूती और पीढ़ियों से सार्वजनिक चर्चा के प्रति लगातार प्रतिबद्धता वाली यात्रा बताया। 1949 में सेंसरशिप के खिलाफ इसकी कानूनी चुनौती का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि यह घटना आजाद भारत में मीडिया की आजादी के विकास में एक अहम पड़ाव बन गई, जिसने मुश्किल सवाल उठाने को तैयार एक स्वतंत्र प्रेस के महत्व को और मजबूत किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से, ऑर्गनाइजर ने एकता, अखंडता, सुरक्षा, संस्कृति और शासन से जुड़ी राष्ट्रीय बहसों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों, प्रजा परिषद आंदोलन, चीन और पाकिस्तान के साथ युद्धों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी, राम जन्मभूमि आंदोलन और भारत के सार्वजनिक जीवन की कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं में इसकी भूमिका का जिक्र किया।
आपातकाल के दौरान इस प्रकाशन की भूमिका को याद करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि श्ऑर्गनाइजरश् और इसके सहयोगी प्रकाशन द मदरलैंड उन लोगों के लिए एकजुट होने का केंद्र बन गए जो संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि ऐसे पल हमें याद दिलाते हैं कि प्रेस की आजादी का असली महत्व तभी पता चलता है जब उसका इस्तेमाल साहस के साथ किया जाए।
उपराष्ट्रपति ने प्रफुल्ल केतकर और गौतम चैबे की किताब श्हिंदुत्व डिस्कोर्स आफ्टर इंडिपेंडेंस – रीडिंग विद ऑर्गनाइजर पेजेजश् और डॉ. उज्ज्वला चक्रदेव की किताब श्टेम्पल्स बियॉन्ड भारतश् का भी विमोचन किया। श्हिंदुत्व डिस्कोर्स आफ्टर इंडिपेंडेंसश् का जिक्र करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि श्ऑर्गनाइजरश् के आठ दशकों के दस्तावेज भारत के राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास का एक महत्वपूर्ण संग्रह हैं और आजाद भारत में हिंदुत्व की चर्चा के विकास को समझने का एक मूल्यवान जरिया हैं। इस अहम पड़ाव पर भारत प्रकाशन लिमिटेड, एडिटोरियल टीम और पाठकों को बधाई देते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि अपने सदाबहार टैगलाइन ष्वॉइस ऑफ द नेशन (राष्ट्र की आवाज) के अनुरूप, श्ऑर्गनाइजरश् ने लगातार ऐसे मुद्दों को सामने रखा है जिन्हें कई लोग नजरअंदाज करना पसंद करते थे। कार्यक्रम के दौरान दत्तात्रेय होसबोले की बातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऑर्गनाइजर ने राष्ट्र की आत्मा की आवाज के तौर पर काम किया है। इसे किसी संकीर्ण या स्वार्थी मकसद से नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय हित और भारत को एक मजबूत, समृद्ध और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभरते हुए देखने के विजन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से निर्देशित किया गया है।
इस मौके पर मौजूद लोगों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, भारत प्रकाशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार गोयल, ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत के संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल शामिल थे।
उप-राष्ट्रपति ने ‘ऑर्गनाइज़र वीकली’ के 80वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कहा कि लोकतंत्र तब फलते-फूलते हैं जब प्रेस तथ्यों का सम्मान करते हुए, विश्वसनीयता बनाए रखते हुए और उच्च पेशेवर मानकों का पालन करते हुए जानकारी देता है, सवाल पूछता है और जानकारीपूर्ण सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी तभी सार्थक
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