बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम और आज की तारीख में बहुत कुछ बदल चुका है। मुख्यमंत्री की कुर्सी से नीतीश कुमार हट चुके हैं। सम्राट चैधरी नये सीएम बन चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने अपने एक विधायक को पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया, फिर मंत्री पद से इस्तीफा दिलवा कर राज्यसभा चुनाव जिताया और अंततः विधायकी से इस्तीफा हो गया।
नीतीश कुमार तो राज्यसभा जा ही चुके हैं। अब सत्ता चूंकि भाजपा के पास नई-नई आई है, यानी नई सरकार का गठन हुआ है तो विधानसभा में बहुमत प्रस्ताव की औपचारिकता भी होगी। औपचारिकता इसलिए, क्योंकि परिस्थितियां कितनी भी बदलीं, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बहुत बड़े अंतर से महागठबंधन के मुकाबले आगे है। तेजस्वी यादव 2024 में तो खेला नहीं ही कर सके थे, इस बार भी उनके हाथ खाली ही रहेंगे। यह भी संभव है कि बहुमत साबित करने कहा जाए तो तेजस्वी ही नुकसान में रहें।
243 में से 201 विधायक एनडीए के, कुछ आ भी सकते हैं
बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या 243 रहती है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या 242 है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 122 है। इस जादुई आंकड़े से बहुत आगे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास नितिन नवीन के इस्तीफे के बावजूद विधायकों की संख्या 201 है। मतलब, तेजस्वी यादव मौजूदा स्थिति में बहुमत साबित करने के लिए संख्या गिनती कराने का प्रयास करें तो 201 में कोई संशय नहीं है। उल्टा, 2024 के 12 फरवरी जैसा खतरा भी उनकी तरफ ही मंडरा रहा है।
कांग्रेस विधायक राज्यसभा चुनाव में दिखा चुके लक्षण
किसी भी विपक्ष के लिए सत्ता पक्ष का बहुमत प्रस्ताव एक मौका होता है, लेकिन इस बार तेजस्वी यादव शायद ही कोई खतरा मोल लें। इस खतरे की जांच वह राज्यसभा चुनाव में कर चुके हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान बिहार की पांच में से एक सीट पर महागठबंधन लड़ाई में था, लेकिन राजद के एक और कांग्रेस के तीन विधायकों की गैरहाजिरी ने ऐन मौके पर तेजस्वी यादव के पूरे मैनेजमेंट को चकनाचूर कर दिया। तेजस्वी यादव 12 फरवरी 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बहुमत परीक्षण के दौरान नंबर गेम खेलकर मात खा चुके हैं। तब भी महागठबंधन के विधायकों ने पाला बदल कर तेजस्वी को जोर का झटका दिया था।
तेजस्वी यादव एनडीए की सरकार गिराने का दावा कर रहे थे और उस फ्लोर टेस्ट में महागठबंधन की रही-सही ताकत भी चली गई थी। शेष कसर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूरी हो गई, जब 202 के मुकाबले महागठबंधन 35 पर रह गया था। इनमें राजद के 25, कांग्रेस के छह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी के दो, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और आईआईपी के एक-एक विधायक थे। राज्यसभा चुनाव के दौरान असद्दुदीन ओवैसी की एआईएमआईएम के पांच और कुमारी मायवती की बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक ने महागठबंधन का साथ दिया। राजद के एक और कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे थे। यानी, दिखने को तेजस्वी के पास 41 विधायक ऑन रिकॉर्ड हैं, लेकिन इनमें से चार को घटाकर ही चलना चाहिए।








