• National
  • उपराष्ट्रपति ने संगीता राॅय की पुस्तक का विमोचन किया

    भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में संसद सदस्य (लोकसभा) डॉ. जयंत कुमार रॉय और सुश्री संगीता रॉय द्वारा लिखित पुस्तक संस्कृति रत्न भंडार भौवैयार इतिब्रिटो (भवाइया ए कल्चरल ट्रेजर एंड इट्स हिस्टोरिकल जर्नी) का विमोचन किया। सभा को संबोधित करते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने कोच राजबंशी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक


    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement


    भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में संसद सदस्य (लोकसभा) डॉ. जयंत कुमार रॉय और सुश्री संगीता रॉय द्वारा लिखित पुस्तक संस्कृति रत्न भंडार भौवैयार इतिब्रिटो (भवाइया ए कल्चरल ट्रेजर एंड इट्स हिस्टोरिकल जर्नी) का विमोचन किया।

    3c3ca3d25900b69caeb0b0c49c3018ff


    सभा को संबोधित करते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने कोच राजबंशी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भवाइया लोक परंपरा को मुख्यधारा में लाने के लिए लेखकों के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण पहलू को दस्तावेजीकरण और संरक्षण प्रदान करने में प्रकाशक, कथा-ओ-कहिनी के योगदान की भी प्रशंसा की।उन्होंने कहा कि देशभर की भाषाएँ, संगीत, रीति-रिवाज और परंपराएँ सामूहिक स्मृति का खजाना और राष्ट्र की साझा विरासत के जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल और आसपास के क्षेत्रों की मिट्टी से निकली भवाइया भाषा पीढ़ियों से आम लोगों की भावनाओं, आकांक्षाओं, संघर्षों और ज्ञान को प्रतिबिंबित करती रही है।


    उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक भवाइया के ऐतिहासिक विकास का व्यवस्थित ढंग से वर्णन करती है और इसके उद्भव एवं विकास पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि यह कृति लोक परंपराओं, धार्मिक प्रथाओं, कृषि रीति-रिवाजों, मौसमी त्योहारों और सामुदायिक जीवन की भूमिका को उजागर करती है, जो भवाइया को लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभवों की एक स्वाभाविक अभिव्यक्ति के रूप में आकार देती है।उन्होंने आगे कहा कि यह पुस्तक उत्तरी बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास और कोच राजबंशी समुदाय के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करती है।


    उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन भारत में संगीत को मानवीय चेतना को ब्रह्मांडीय व्यवस्था से जोड़ने का एक साधन माना जाता था। सामवेद, नाद ब्रह्म की अवधारणा और भक्ति एवं सूफीवाद की परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि संगीत को हमेशा से ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग माना गया है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के उदय से बहुत पहले, भारत में भरत मुनि का नाट्य शास्त्र मौजूद था, जिसमें संगीत को मानवीय भावनाओं और आध्यात्मिक अनुभूति की मूलभूत अभिव्यक्ति माना गया है।


    भवाइया की मजबूती पर जोर देते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि आधुनिकीकरण, शहरीकरण और वैश्वीकरण की ताकतों के बावजूद, यह परंपरा जीवित और विकसित होती रहती है क्योंकि यह प्रामाणिक मानवीय अनुभवों और सार्वभौमिक भावनाओं में निहित है।
    उपराष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी से सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए उनसे भाषाओं, रीति-रिवाजों, मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि भारत के 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग बना रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास तभी सार्थक होता है जब उसके साथ सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सभ्यतागत जागरूकता भी हो।हाल ही में मनाए गए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, योग और मिशन लाइफ जैसी पहलों के लिए विश्व तेजी से भारत की ओर देख रहा है।


    महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उद्धृत करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की शक्ति एकरूपता में नहीं, बल्कि एक साझा सभ्यतागत भावना से एकजुट इसकी जीवंत विविधता में निहित है। श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा, “हमारे पास अनेक भाषाएँ, संस्कृतियाँ और समुदाय हैं, फिर भी हम एक राष्ट्र हैं और एक ही सभ्यतागत भावना साझा करते हैं। भारत एक है और सदा एक रहेगा।”
    इस अवसर पर उपस्थित लोगों में राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगलाय लोकसभा सांसद और पुस्तक के लेखक डॉ. जयंता कुमार रॉयय पुस्तक की सह-लेखिका सुश्री संगीता रॉयय कूच बिहार पंचानन बर्मा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) निखिल चंद्र रायय और कथा-ओ-कहिनी के प्रकाशक देबराज पात्रा शामिल थे।


    भवाइया के बारे में
    भवाइया उत्तरी बंगाल, असम और आसपास के क्षेत्रों की एक पारंपरिक लोक संगीत शैली है। यह संगीत परंपरा इस क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और कृषि परिदृश्य में गहराई से समाई हुई है और इसकी सामूहिक विरासत की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति बनी हुई है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    प्रतिमाह ₹.199/ - सहयोग कर नूतन चर्चा को आजद रखिये. हम आजाद है तो आवाज भी बुलंद और आजाद रहेगी . सारथी बनिए और हमें रफ़्तार दीजिए। सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    Ankita Sharma Avatar
    Ankita Sharma पिछले एक वर्ष से सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कार्यरत हैं। कंटेंट राइटिंग, वेब मैनेजमेंट और न्यूज़ एडिटिंग का अनुभव रखती हैं। वर्ष 2025 में पत्रकारिता की शुरुआत की और तब से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्य कर रही हैं। खबरों को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में विशेष रुचि रखती हैं। वर्तमान में Website Content Manager के पद पर Nutancharcha से जुड़ी हैं। राष्ट्रीय, सोशल, पॉलिटिकल और ट्रेंडिंग विषयों पर लेखन में विशेष दिलचस्पी है।
    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    Related Stories

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement