देश में भगवान के नाम आम लोगों के द्वारा दिए गये चंदे की चोरी हो गई और सरकार मुक दर्शक बनी हुई है। जिस देश में भगवान के नाम पर लोगों ने चढ़ावा 200 करोड़ रुपये दिया चोरी कर ली गई। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसों में हेराफेरी और चोरी के आरोपों को लेकर लगभग 200 करोड़ रुपये के गबन सामने आया है ।
इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं, आरोपहै कि कुछ याचिकाकर्ताओं और राजनेताओं (जैसे आम आदमी पार्टी) ने आरोप लगाया है कि मंदिर के दान पात्रों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की रकम, सोने की शिलाएं और लगभग 200 किलो चांदी गायब हुई है । मंदिर के पूर्व अकाउंटेंट ने भी पैसों की हेराफेरी का आरोप लगाया है ।

एसआईटी जांच इन गंभीर आरोपों के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक तीन-सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है जो पूरे दान और बहीखाता प्रणाली की जांच कर रहा है ।
प्राथमिक कार्रवाई आरोपों और शिकायतों के आधार पर, पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा कुछ कर्मचारियों के घरों से नकद बरामदगी और गिरफ्तारियां भी की गई हैं ।
हालाँकि, अभी तक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से किसी निश्चित चोरी की राशि की पुष्टि नहीं की गई है। मामले की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट और एसआईटी द्वारा की जा रही है।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला- ये आठ लोग हिरासत में, जानिए क्या थी इनकी जिम्मेदारी अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने के बाद देर शाम आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बीबीसी न्यूज हिन्दी से कहा कि राम मंदिर के दानपात्रों से नकदी और कीमती सामान की कथित चोरी के मामले में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सभी आठ अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्हें अगले एक-दो दिनों में मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया जाएगा।
एफआईआर में नामित सभी अभियुक्त उस टीम का हिस्सा थे, जो 40 दानपात्रों के चढ़ावे को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र पहुँचाने के बाद गिनती का काम करती थी। जांच एजेंसियां मंदिर फंड के उलटफेर में उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। यह एफआईआर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई।
मामला भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं में दर्ज किया गया है जो कर्मचारी की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।
एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं, वे हैं टीनू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और रामशंकर मिश्रा। टिन्नू यादव निगरानी की भूमिका में थे, बाकी सभी नकदी गिनने के काम में लगे थे।
शिकायत के अनुसार, अभियुक्तों ने आपसी साजिश के तहत श्रद्धालुओं के चढ़ाए गए धन का गबन किया और ट्रस्ट के फंड का दुरुपयोग किया। मामला मंदिर परिसर में लगे दानपात्रों से एकत्र रकम के कथित उलटफेर से जुड़ा है। 13 जून को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट की मांग पर एसआईटी का गठन किया गया था। इस समिति की अध्यक्षता विजय विश्वास पंत कर रहे हैं. पैनल में किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न कुमार भी शामिल हैं। समिति को प्रक्रियागत खामियों की पहचान करने और यह जांचने का काम सौंपा गया था कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है।









