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  • विकसित भारत-2047 की यात्रा में युवाओं की अहम भूमिका है – उपराष्ट्रपति

    उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि चेन्नई के एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 22 वें दीक्षांत समारोह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसी रणनीतिक तकनीकें भविष्य को आकार देंगी। जब रिसर्च समाज की सेवा करती है, तो वह अपना सर्वोच्च उद्देश्य प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 की यात्रा


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    उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि चेन्नई के एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 22 वें दीक्षांत समारोह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसी रणनीतिक तकनीकें भविष्य को आकार देंगी। जब रिसर्च समाज की सेवा करती है, तो वह अपना सर्वोच्च उद्देश्य प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 की यात्रा में युवाओं की अहम भूमिका है। 2014 के बाद से उच्च शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है। खुद को केवल भविष्य के लिए तैयार न करें खुद को भविष्य को आकार देने के लिए तैयार करें।
    तमिलनाडु में ड्रग्स से जुड़ी जानकारी देने के कारण हुई छात्र की हत्या पर उप-राष्ट्रपति ने गहरा दुख व्यक्त किया, सभी से ड्रग्स को नाश कहने का आग्रह किया।
    भारत के उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के पास कट्टनकुलथुर, चेंगलपट्टू में एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आरएमआईएसटी) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और ग्रेजुएट हो रहे छात्रों से राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत से प्रेरित होकर राष्ट्र-निर्माण के लिए अपने ज्ञान, कौशल और इनोवेशन का उपयोग करने का आह्वान किया।
    ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को संबोधित करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने से कहीं अधिक है। यह वर्षों की लगन, अनुशासन और सीखने की प्रक्रिया का जश्न है और साथ ही जिम्मेदारी और सेवा की जीवन भर चलने वाली यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
    सी. पी. राधाकृष्णन ने आरएमआईएसटी की सराहना की उसने ऐसा एकेडमिक इकोसिस्टम बनाया है जो इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग (विभिन्न विषयों की मिली-जुली पढ़ाई), क्रिएटिविटी, एंटरप्रेन्योरशिप और क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर रिसर्च, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर संस्थान के बढ़ते फोकस का उल्लेख करते हुए कहा कि ये क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को आकार देंगे।
    उप-राष्ट्रपति ने रिसर्च को व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर आरएमआईएसटी के जोर की सराहना की, जिससे लोगों का जीवन बेहतर हो, इंडस्ट्री मजबूत हो और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में योगदान मिले। उन्होंने कहा कि जब रिसर्च समाज की सेवा करती है, तो वह अपना सर्वोच्च उद्देश्य प्राप्त करती है।
    उप-राष्ट्रपति ने कहा कि रिसर्च तब वास्तव में सराहनीय होती है जब वह सही परिणाम देती है, समाज पर सार्थक प्रभाव डालती है और लोगों के लिए व्यावहारिक लाभ में बदलती है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 100 से ज्यादा देशों को कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराईं। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता का व्यवसायीकरण करने की कोशिश नहीं की। हाल ही में केन्या के स्पीकर के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए, जिन्होंने भारत की वैक्सीन सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था, उन्होंने कहा कि कई पश्चिमी देशों ने गरीब देशों को ऐसी सहायता नहीं दी। उन्होंने कहा कि भारत के प्रयासों ने मानवता की रक्षा में मदद की और दोहराया कि भारत शांति, विकास और मानवता के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देश भर में एआईआईएमएस उपलब्ध होने चाहिए, ताकि चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पूरे भारत में लोगों तक पहुंच सकें।
    उपराष्ट्रपति ने 2014 के बाद से देश में उच्च शिक्षा के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान 16 आईआईआईटी, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 आईआईएम, 7 आईआईटी, 2 आईआईएसईआर, 1 एनआईटी और 12 आईआईएम स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में 1,425 से ज्यादा विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्टैंडअलोन संस्थान हैं।
    सी. पी. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि – 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में डिग्री और मेडल प्राप्त करने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या एक स्वागत योग्य घटनाक्रम है।
    सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्नातक विकसित भारत-2047 की दिशा में भारत की यात्रा के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक विकसित, अभिनव, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का विजन हर युवा भारतीय से राष्ट्र-निर्माण में योगदान करने का आह्वान करता है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत इसके लोग, विशेषकर इसके युवा हैं। स्नातक होने वाले छात्रों के साथ अपना संदेश साझा करते हुए उन्होंने कहा कि खुद को केवल भविष्य के लिए तैयार न करें, खुद को भविष्य को आकार देने के लिए तैयार करें। उन्होंने छात्रों से ड्रग्स और किसी भी तरह के नशे से दूर रहने की अपील की और उनसे कहा कि वे भटकाव के बजाय अनुशासन, लालच के बजाय मकसद और आसान शॉर्टकट के बजाय बेहतरीन काम को चुनें।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि तमिलनाडु की हालिया घटना, जिसमें ड्रग्स के कारोबार के बारे में जानकारी देने पर एक छात्र की हत्या कर दी गई, बहुत दुखद थी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने अपने ही परिवार का कोई सदस्य खो दिया हो।
    ग्रेजुएट्स से राष्ट्र प्रथम को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके ज्ञान, इनोवेशन और कड़ी मेहनत से भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान मिलना चाहिए। उन्होंने उनसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और विविधता का सम्मान करने का आग्रह किया।

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