उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी लीडरशिप ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दिया है और पैरेलल इकॉनमी (समानांतर अर्थव्यवस्था) को कम करने में मदद की है। सही लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाने और असरदार गवर्नेंस के लिए सटीक डेटा जरूरी है।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि जमीनी हकीकत को समझने के लिए सांख्यिकीविदों (स्टैटिस्टिशियन) के लिए फील्ड का अनुभव बहुत जरूरी है। डेटा-आधारित गवर्नेंस सिस्टम बनाने में इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस (आईएसएस) के अधिकारियों की अहम भूमिका है अधिकारियों को संबोधित करते किया।
सटीक और भरोसेमंद डेटा की अहम भूमिका पर जोर देते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा, अगर डेटा सही नहीं है, तो कोई भी फैसला सही नहीं हो सकता। उन्होंने जोर दिया कि भरोसेमंद डेटा के बिना असरदार प्लानिंग, संसाधनों का बंटवारा और सरकारी योजनाओं को लागू करना मुमकिन नहीं होगा। अगर सही लाभार्थियों की पहचान नहीं की गई, तो सीमित संसाधनों की बर्बादी भी हो सकती है। उन्होंने कहा, डेटा सही ढंग से इकट्ठा किया जाना चाहिए और सही समय पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बुनियादी डेटा ही गलत होगा, तो राष्ट्रीय चुनौतियों के सही समाधान खोजना मुश्किल हो जाएगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकारी आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि गवर्नेंस के ऐसे साधन हैं जो सरकार को यह समझने में मदद करते हैं कि देश, उसके लोग और समाज के अलग-अलग वर्ग किस स्थिति में हैं। उन्होंने जोर दिया कि सरकारी कार्यक्रमों को असरदार ढंग से लागू करने के लिए फील्ड का अनुभव, डेटा का सही कलेक्शन, उसका सही रखरखाव और समय पर डेटा पेश करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, किसी योजना की सफलता या विफलता काफी हद तक डेटा की क्वालिटी पर निर्भर करती है। उन्होंने सरकारी कार्यक्रमों का फायदा सही लाभार्थियों तक पहुँचाने में सांख्यिकीविदों की अहम भूमिका पर जोर दिया।
सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत के सांख्यिकीय और प्रशासनिक डेटा इकोसिस्टम को मजबूत करने पर बात की, जिसमें डिजिटल डेटाबेस, जीएसटी डेटा और हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक जानकारी शामिल है। डिजिटल ट्रांजैक्शन में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी लीडरशिप ने इनके विस्तार में अहम योगदान दिया है और पैरेलल इकॉनमी को कम करने में मदद की है। उन्होंने आर्थिक गणना और देश की वास्तविक ग्रोथ को सही ढंग से मापने के लिए सही बेस ईयर (आधार वर्ष) के महत्व पर भी जोर दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि सिर्फ आर्थिक संकेतकों से ही लोगों की भलाई की पूरी तस्वीर नहीं मिल सकतीय खुशी और जीवन की क्वालिटी जैसे पैमाने भी अहम हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि आंकड़ों की अहमियत भरोसे से बनती है, उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से पेशेवर और नैतिक ईमानदारी, राजनीतिक निष्पक्षता, गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा अपने सीनियर के प्रति सम्मान दिखाने का असली तरीका सिर्फ रस्मी तौर-तरीके नहीं, बल्कि कुशलता और जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना है। उन्होंने ट्रेनी अधिकारियों से लगातार सीखने की आदत डालने, फील्ड के अनुभव से सीखने और सीनियर, साथियों व जूनियर से सीखने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।
सी. पी. राधाकृष्णन ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे जिज्ञासु और मेहनती बने रहें तथा नई सोच (इनोवेशन) के लिए तैयार रहें, साथ ही अपनी पेशेवर आजादी से कभी समझौता न करें। उन्होंने कहा कि विकास के लिए डेटा और डेटा-आधारित फैसले लेना विकसित भारत/2047 के लिए एक मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली बनाने में बहुत अहम होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि 2026 बैच भारतीय सांख्यिकीय सेवा की बेहतरीन परंपराओं को बनाए रखेगा और ऐसी डेटा-आधारित प्रणाली में सार्थक योगदान देगा जिससे लोगों को ठोस फायदा हो।
इस मौके पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्गय डेटा गवर्नेंस के महानिदेशक पी. आर. मेश्रामय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और ट्रेनी अधिकारी मौजूद थे।









