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  • राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ बने जितेंद्र मिश्रा

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को चुना है। उन्होंने 39 साल तक एयरफोर्स में सेवा दी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे एयरफोर्स की वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। ऑपरेशन सिंदूर में उनके रोल के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल


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    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को चुना है। उन्होंने 39 साल तक एयरफोर्स में सेवा दी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे एयरफोर्स की वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। ऑपरेशन सिंदूर में उनके रोल के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित भी किया गया। ये विशिष्ट अवॉर्ड में युद्ध सीरीज का सबसे बड़ा अवॉर्ड है।

    ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुताबित ट्रस्ट को सीईओ पद के लिए कुल 5585 आवेदन मिले थे। जिसमें जितेंद्र मिश्रा का भी आवदेन था। इन आवेदनों की जांच ट्रस्ट के सचिवालय ने समीर पांडा के नेतृत्व में की। इसके लिए एआई सूचना तकनीक, व्यक्तिगत बातचीत और सत्यापन जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया। ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुताबिक जितेंद्र मिश्रा को भी बाकी उम्मीदवारों की तरह ही स्क्रीनिंग, सत्यापन और ऑनलाइन मूल्यांकन से गुजरना पड़ा। अगस्त महीने में अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू हुआ। वह अंतिम रूप से चुने गए 16 उम्मीदवारों में शामिल थे।

    ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने बताया कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) के लिखित आवेदन में एक वाक्य ऐसा था जो किसी विजन स्टेटमेंट से ज्यादा संकल्प जैसा लगता है।

    उन्होंने लिखा था कि मैं ऐसा मंदिर चाहता हूं जहां हर श्रद्धालु को सुरक्षा, सम्मान और उच्च स्तर के आध्यात्मिक दर्शन का अनुभव हो। ट्रस्ट को मिलने वाले हर रुपये का पूरी पारदर्शिता के साथ इस्तेमाल हो।

    साथ ही मंदिर की परंपराओं और सुरक्षा व्यवस्था का संचालन ऐसी अनुशासनपूर्ण व्यवस्था के तहत हो, जो लंबे समय तक राष्ट्रीय महत्व रखने वाली संस्था के अनुरूप हो।

    सीईओ चुनने के प्रक्रिया में शामिल एक स्वयंसेवक ने बताया कि मिश्रा सरयूपारीण ब्राह्मण हैं। यह समुदाय सरयू नदी के किनारे रहने वाले लोगों से अपनी पहचान जोड़ता है। अयोध्या भी सरयू नदी के घाटों पर बसी है। उन्होंने कहा कि मिश्रा का जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया में हुआ। यह वह इलाका है, जहां रामकथा सिर्फ साहित्य का हिस्सा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। हिंदी उनकी मातृभाषा है। उन्होंने स्कूल में संस्कृत की पढ़ाई की और वे वैष्णव परंपरा से जुड़े हैं।

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