• Bihar
  • बिहार विधान परिषद के 10 सीटों पर 9 सीटों पर एनडीए

    बिहार में विधान परिषद के दस सीटों में 9 सीटों पर एनडीए का कब्जा होना तय माना जा रहा है और एक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) महागठबंधन को मिलने की रणनीति चल रही है।बिहार की राजनीति इन दिनों विधान परिषद की कुल 10 सीटों पर होने वाले चुनाव के इर्द गिर्द शुरू हो


    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    बिहार में विधान परिषद के दस सीटों में 9 सीटों पर एनडीए का कब्जा होना तय माना जा रहा है और एक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) महागठबंधन को मिलने की रणनीति चल रही है।
    बिहार की राजनीति इन दिनों विधान परिषद की कुल 10 सीटों पर होने वाले चुनाव के इर्द गिर्द शुरू हो गई है। एनडीए 9 सीटों और महागठबंधन एक सीट जीत लेने के अंदाज में रणनीति बना रही है। लेकिन इससे इतर एक संघर्ष एनडीए के दो बड़े दलों भाजपा और जदयू में है। एक बार फिर बड़े भाई और छोटे भाई की जंग शुरू हो गई है। जदयू और भाजपा के बीच 4 बनाम 3 सीटों की दावेदारी का खेल चल रहा है। जदयू के रणनीतिकारों का मानना है कि राज्यसभा में भाजपा ने नंबर वन पार्टी बन तीन राज्यसभा सीटें झटक ली थीं। इस बार एमएलसी के चुनाव में जदयू के दावे जायज हैं।
    9 सीटों पर चुनाव और एक सीट पर उप चुनाव
    विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से सत्तारूढ़ गठबंधन 9 जबकि विपक्ष एक सीट जीत सकता है। एमएलसी के रिक्त हुए जिन 9 सीटों को ले कर चुनाव होने हैं वह छह साल के लिए होने हैं। वहीं पूर्व सीएम नीतीश कुमार की छोड़ी गई 1 सीट पर 4 साल के बचे कार्यकाल के लिए उप-चुनाव होना है। नामांकन 1 जून से शुरू हो गया है और अगले 8 जून तक पर्चा भरने का काम बंद हो जाएगा। अगर कैंडिडेट 10 ही रहे तो सभी निर्विरोध जीत जाएंगे, नहीं तो 18 जून को मतदान और शाम में गिनती के साथ नतीजे भी आएंगे।
    श्रवण कुमार ने फूंका बिगुल
    एनडीए की राजनीति में भूचाल ले कर जेडीयू नेता और बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार आए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि जनता दल यूनाइटेड विधान परिषद चुनाव की 10 सीटों में से 4 सीटों पर लड़ेगी। हमारा दावा पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन मिलना है। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने तीन सीट ली थी तो इस बार एमएलसी के चुनाव में जदयू का पलड़ा भारी रहेगा।
    नीतीश कुमार की खाली सीट से विधानपरिषद नहीं जाएंगे निशांत कुमार। निशांत कुमार 6 साल वाली पूर्णकालिक सीट से एमएलसी बनेंगे। 4 साल वाली सीट के लिए किसी और को मौका दिया जाएगा।
    जदयू के भीतर जारी है रस्साकसी
    सामाजिक समीकरण के हिसाब से जदयू के भीतर उम्मीदवारी को ले कर चर्चा शुरू है। जदयू के भीतर पिछड़ा, अतिपिछड़ा और सवर्ण नेताओं की लॉटरी लगने वाली है। नामों की सूची भी तय है। पिछड़ा में लव कुश समीकरण को तुष्ट करना है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पूर्णकालिक यानि 6 साल वाली सीट के दावेदार हैं। इनके अलावा सम्राट चैधरी के लिए सीटिंग सीट छोड़ने वाले राजीव कुशवाहा की भी चर्चा परवान पर है। अति पिछड़ा में ललन मंडल रेस में आगे हैं। सवर्ण का कोटा राजपूत के हक में जाने की संभावना है। बीजेपी से ब्राह्मण नेता को बनाने की बात चल रही है। जदयू से राजपूत उम्मीदवार में हर्षवर्धन और चंदन सिंह पर जदयू के रणनीतिकार बाजी खेलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
    बीजेपी की तैयारी भी चार सीटों पर
    अब तक पिछड़ा, अतिपिछड़ा और सवर्ण को ले कर बिहार एमएलसी चुनाव के लिए बिसात बिछा रहे थे। लेकिन अब दावेदारी के खेल में चार सीटों की रणनीति बनाने में भिड़ गई है। अब बीजेपी का समीकरण पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और सवर्ण हो चुका है। इस संदर्भ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति ने 12 नामों की सूची भेज दी है। इसे शॉर्ट लिस्ट करने का काम भी किया गया है। ऐसे में पिछड़ा से कुर्मी नेता प्रेम रंजन पटेल, कायस्थ से संजय मयूख, ब्राह्मण से लाजवंती झा और दलित से गुरु प्रकाश का नाम रेस में शामिल होते दिख रहा है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    प्रतिमाह ₹.199/ - सहयोग कर नूतन चर्चा को आजद रखिये. हम आजाद है तो आवाज भी बुलंद और आजाद रहेगी . सारथी बनिए और हमें रफ़्तार दीजिए। सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    Related Stories

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement