बिहार सहित पूरे देश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है। पूरा सरकारी सिस्टम (व्यवस्था) भ्रष्टाचार की गंगोत्री में स्नान कर रही है। आई फोन अच्छा है है, 5 किलो आम भेजो, बिहार के टेंडर माफिया रिश्रु श्री के आईएएस अफसरों वाले कोडवर्डस ईस्तमाल किये जा रहे हैं।
ये कितने हैरत की बात है कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा पास कर आईएएस बनने वाले अफसर, एक ठेकेदार की उंगलियों पर नाचने लगे। टेंडर घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री की कारगुजारियों ने बिहार की शीर्ष नौकरशाही के पतन को उजागर कर दिया है। रिशु श्री से लाभ लेने के आरोप में आईएएस अफसर योगेश कुमार सागर (2017) और अभिलाषा कुमारी शर्मा (2014) को सस्पेंड कर दिया गया है। रिशु की गिरफ्तारी के बाद बिहार के आईएएस अधिकारियों में खौफ पैदा हो गया है। जैसे-जैसे ईडी और एसभीयू की जांच आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे कुछ अधिकारियों की नींद भी उड़ेगी। ईडी के पास रिशु से संबंध रखने वाले 12 अधिकारियों की लिस्ट है। कब किसका नंबर आएगा , कोई नहीं जानता। ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार के जमाने वाली ब्यूरोक्रेसी आसमान से जमीन पर गिरने वाली है।
डायरी और डिजिटल साक्ष्य में 12 अफसरों के नाम
जब रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी तब एक डायरी बरामद हुई थी। इस डायरी में उन आईएएस अधिकारियों के नाम कोड वर्ड में लिखे हैं जिनसे रिशु ने लेन-देन किया है या महंगे उपहार दिये हैं। अधिकारियों के नाम अस्पष्ट हैं। सिर्फ संबंधित विभागों के सामने एम1, एम2 आदि लिखा है। इसके अलावा रिशु के जब्त मोबाइल और लैपटॉप से डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जब रिशु का मोबाइल और लैपटॉप जब्त किया गया था तब उसमें से डाटा और चैट लॉग को डिलीट कर दिया गया था। लेकिन ईडी की साइबर टीम और डिजिटल फॉरेंसिक लैब के विशेषज्ञों ने सारे डिलीट डाटा को रिकवर कर लिया। इसके बाद यह पता चला गया कि रिशु ने व्हाट्सएप पर किन किन अफसरों से क्या क्या चैट किया है।
ईडी के हलफनामा में चैट और डिजिटल साक्ष्य
नवम्बर 2025 में ईडी ने पटना हाईकोर्ट से समक्ष एक हलफनामा दायर किया था। ईडी ने रिशु से लाभ लेने वाले अधिकारियों पर जो आरोप लगाये थे उसके समर्थन में गिफ्ट में दिये गये उपकरणों की तस्वीरें और व्हाट्सएप चैट संलग्न किये थे। एक चैट में महिला आईएएस अधिकारी कहती हैं, मोबाइल बहुत अच्छा है भाई ! इस महिला अधिकारी को एक महीना पहले उपहार में आईफोन और आईपैड मिला था। कहा जा रहा है कि ईडी ने इस चैट के जरिये आईफोन लेने वाली जिस महिला आईएएस अधिकारी की पहचान की वे थीं अभिलाषा कुमारी शर्मा। जिसने उपहार दिया उसकी पहचान रिशु रंजन सिन्हा के रूप में हुई। अभिलाषा शर्मा का निलंबन, ईडी की जांच रिपोर्ट और विशेष निगरानी इकाई के इनपुट के आधार पर हुआ है। हालां कि अभी इस मामले में जांच जारी है। 5 किलो आम भेजो, मतलब पांच लाख रुपये भेजो, अधिकारी का इनकार।
ईडी के हलफनामा में एक और चैट का जिक्र है। एक आईएएस अधिकारी कहता है, तत्काल 5 किलो आम भेजो। जवाब मिलता है-जी भैया। आरोप हैं कि ईडी ने अपने हलफनामा में 5 किलो आम मांगने वाले आईएएस की पहचान संतोष कुमार मल्ल के रूप में की है। हालां कि इस मामले की जांच अभी जारी है। जी भैया, कहने वाला रिशु रंजन सिन्हा है। यहां 5 किलो आम एक कोड वर्ड है। दरअसल यहां 5 किलो आम भेजने का मतलब है पांच लाख रुपये भेजो। जब ईडी ने अपने हलफनामे में संतोष कुमार मल्ल का जिक्र किया था तब उन्होंने इसका पुरजोर खंडन किया था। उनका कहना था, रिशु ने उनका नाम एक सम्पर्क नम्बर से सेव किया है जो उनका नहीं है। मुझे रिशु श्री से कुछ लेना देना नहीं। मैंने रिशु को व्हाट्सएप पर आम या किसी अन्य चीज का अनुरोध नहीं किया है।
आईएएस अधिकारी ने कहा, रिशु से मेरा कोई संबंध नहीं
करीब पांच महीने बाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष कुमार मल्ल ने एक बार फिर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा, रिशु से मेरा कोई संबंध नहीं है। उसने किसी दूसरे के मोबाइल नम्बर को मेरे नाम से गलत तरीके से सेव कर लिया था। उस नम्बर के साथ हुए व्हाट्सएप चैट को गलती से मेरे साथ जोड़ दिया गया है। मैं नगर विकास विभाग में मुश्किल से पांच महीने भी नहीं रहा। मेरा तबादला अन्य विभाग में हो गया था। संतोष कुमार मल्ल ने ये बातें एक बार फिर तब दोहरायी हैं जब रिशु श्री से जुड़े दो आईएएस अधिकारियों का निलंबन हो चुका है।
ईडी ने कुछ और अधिकारियों के नाम बताये
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में आनंद किशोर का भी नाम लिया है। आनंद किशोर जैसे मजबूत अफसर की भी नाम ईडी ने लिया है। ईडी ने धर्मेंद्र कुमार का भी नाम बताया है। ईडी ने 2025 में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुमुक्षु चैधरी के ठिकाने पर छापेमारी की थी। चैधरी ने ईडी को दिये अपने बयान में कहा था कि रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा से उनकी 2012 में जान पहचान हुई थी। रिशु उस समय से ही ट्रांसफर-पोस्टिंग में दखल रखता था। चैधरी के मुताबिक, उन्हें सीतामढ़ी के नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए रिशु ने वरीय अधिकारियों को 25 लाख रुपये दिये थे। इस रकम की भरपाई स्वच्छता अभियान टेंडर के मुनाफे से की गयी। चैधरी ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि उनके कार्यकाल में रिशु को सीतामढ़ी में 4 करोड़ और सहरसा में 5 करोड़ का ठेका मिला था। सांसद पप्पू यादव का कहना है, इतनी बड़ी लूट, मंत्री के बगैर नॉलेज के नहीं हुई होगी। इससे संबंधित मंत्रियों के खिलाफ भी एफआईआर होनी चाहिए।









