भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज केन्या की नेशनल असेंबली के स्पीकर (डॉ.) मोसेस एम. वेटंगुला (ईजीएच एमपी) के साथ एक सौहार्दपूर्ण और सार्थक बैठक की। डॉ. वेटंगुला भारत की द्विपक्षीय यात्रा पर आए केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
बैठक के दौरान, उपराष्ट्रपति ने भारत और केन्या के बीच घनिष्ठ संसदीय संबंधों पर प्रकाश डाला और टेक्नोलॉजी समाधानों तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करने की भारत की तत्परता व्यक्त की, जिसमें पेपरलेस संसद की दिशा में डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग भी शामिल है। उन्होंने केन्या के संसदीय मैत्री समूह में भारतीय मूल के सांसद की उपस्थिति का उल्लेख किया और केन्या की नेशनल असेंबली परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने के प्रस्ताव को सराहना के साथ याद किया।
उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में केन्या की यात्रा की थी और उसके बाद 2023 में राष्ट्रपति रुटो ने भारत की यात्रा की थी।
केन्या के साथ भारत की विकास साझेदारी का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने बताया कि अनुदान-सहायता के रूप में कई परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिनमें नैरोबी विश्वविद्यालय की महात्मा गांधी ग्रेजुएट लाइब्रेरी का नवीनीकरण और मतोंग्वे स्थित केन्याई नौसेना बेस पर सीटी स्कैन इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण शामिल है। उन्होंने इबोला वायरस के प्रकोप के दौरान भारत द्वारा दी गई सहायता को भी याद किया, जब भारत ने 4.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप पहुंचाई थी।
उपराष्ट्रपति ने केन्या में क्षमता निर्माण के लिए भारत के निरंतर समर्थन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सरकार लगभग 400 स्कॉलरशिप (छात्रवृत्तियां) प्रदान करती है, जिसमें विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। उन्होंने आगे बताया कि केन्या के 20 राजनयिक भारत में क्षमता विकास प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के लिए आईसीसीआर स्कॉलरशिप की संख्या सालाना 80 से बढ़ाकर 100 कर दी गई है।
उपराष्ट्रपति ने केन्या में डिजी-लॉकर पायलट प्रोजेक्ट पर हुए समझौते का भी उल्लेख किया, जिस पर नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय और केन्याई टीमें केन्या के लिए गति शक्ति प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। उप-राष्ट्रपति ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सीट के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने पर केन्या का धन्यवाद किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए भी केन्या का समर्थन मांगा।
दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए, उप-राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और स्वाहिली तट के बीच एक-दूसरे के फायदे के लिए व्यापारिक रास्ते अच्छी तरह से स्थापित थे। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि केन्या श्इंटरनेशनल सोलर अलायंसश् और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस में शामिल होगा।
उप-राष्ट्रपति ने भारत और केन्या के बीच सदियों पुराने लोगों के आपसी संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि भारतीय मूल के लोगों को केन्या की 44वीं जनजाति के रूप में मान्यता दी गई है।
बैठक के समापन पर, उप-राष्ट्रपति ने भारत आने के लिए केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल का धन्यवाद किया और उनकी यात्रा सुखद और सार्थक रहने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस यात्रा से संसदीय जुड़ाव और गहरा होगा और भारत तथा केन्या के बीच व्यापक साझेदारी को मजबूत करने में मदद मिलेगी।









