लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि भारत और केन्या के बीच हजारों साल पुराने ऐतिहासिक और बहुआयामी संबंध हैं। उन्होंने कहा कि नियमित उच्च-स्तरीय मुलाकातों ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लगातार मजबूत किया है।
ओम बिड़ला ने संसद भवन परिसर में केन्या की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष माननीय (डॉ.) मोसेस एम. वेटंगुला (ईजीएच) के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान ये बातें कहीं। इस साल की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित 28वें (सीएसपीओसी) के दौरान डॉ. वेटंगुला के साथ हुई अपनी पिछली मुलाकात को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि डॉ. वेटंगुला के पास सार्वजनिक जीवन का व्यापक अनुभव है और कानून, विधायी कार्यों व प्रशासन के क्षेत्र में उनका करियर शानदार रहा है। उन्होंने केन्या के लोगों के लाभ के लिए शासन व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत और केन्या के बीच सदियों पुराने जन-संपर्क पर जोर देते हुए, ओम बिड़ला ने केन्या सरकार के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें भारतीय मूल के लोगों को एक मूल समुदाय के रूप में मान्यता दी गई है, इससे दोनों देशों के बीच संबंध और गहरे होंगे। उन्होंने कहा कि भारत और केन्या दोनों ही लोकतंत्र, समावेशी विकास और मानव-केंद्रित प्रगति को महत्व देते हैं। उन्होंने कहा कि यह साझा नजरिया द्विपक्षीय संबंधों को विशेष गहराई देता है। औपनिवेशिक शासन के खिलाफ केन्या के स्वतंत्रता संग्राम पर महात्मा गांधी के प्रभाव का जिक्र करते हुए, बिड़ला ने कहा कि राष्ट्रपिता को पूरी दुनिया में सत्य और अहिंसा के शांतिपूर्ण संघर्ष के एक स्थायी प्रतीक के रूप में माना जाता है। उन्होंने केन्या की संसद में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाने पर सहमति जताने के लिए डॉ. वेटंगुला का आभार व्यक्त किया। श्री बिड़ला ने इस बात पर जोर दिया कि आजादी के बाद से ही संविधान से निर्देशित दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर भारत ने व्यापक विकास और सामाजिक बदलाव हासिल किया है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया में लोगों की भारी भागीदारी देखने को मिलती हैय यहाँ लगभग 97 करोड़ योग्य मतदाता हैं, जिनमें से करीब 65 करोड़ लोग वोट डालते हैं। यह लोकतंत्र में लोगों के भरोसे और विश्वास को दर्शाता है।
यह देखते हुए कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहाँ नागरिकों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को आवाज मिलती है, श्री बिड़ला ने कहा कि भारत और केन्या के बीच संसदीय बातचीत लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देशों में संसदीय मैत्री समूहों के गठन का जिक्र करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का नियमित आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच संसदीय संबंधों को नए आयाम दे सकता है।
यह देखते हुए कि श्पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीजश् (पीआरआईडीई) द्वारा केन्याई संसद की खास जरूरतों के हिसाब से केन्याई संसद के सदस्यों और अधिकारियों के लिए नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, बिड़ला ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में संसदीय कामकाज के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत की संसद ने पारदर्शिता, कार्यकुशलता, समावेशिता और जन-भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अपने कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया है। उन्होंने बताया कि भारत को इस क्षेत्र में अपने अनुभव केन्याई संसद के साथ साझा करने में खुशी होगी।
इसके जवाब में, डॉ. वेटंगुला ने गर्मजोशी से स्वागत के लिए बिड़ला का धन्यवाद किया। उन्होंने याद दिलाया कि इस साल की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित 28वा (सीएसपीओसी)ं सबसे अच्छे ढंग से आयोजित संसदीय कार्यक्रमों में से एक था। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने केन्या की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैय उन्होंने बताया कि भारतीय समुदाय जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय है, जिसमें संसद और सरकार भी शामिल हैं। डॉ. वेटंगुला ने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों, खासकर संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर, पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लोकतांत्रिक सुधारों और 21वीं सदी की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए भारत को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने की भी बात कही।









