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  • अग्नि काण्डों से सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन मुस्तैदः जिलाधिकारी

    पटना, गुरुवार, दिनांक 23.04.2026ः जिलाधिकारी, पटना डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने आम जनता से अग्नि-सुरक्षा हेतु आपदा प्रबंधन विभाग एवं बिहार अग्निशमन सेवा द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन करने का आह्वान किया है। साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन के पदाधिकारियों को वृहद स्तर पर जन-जागरूकता उत्पन्न करने तथा लोगों को सुरक्षा मानकों के प्रति सेंसिटाइज करने


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    पटना, गुरुवार, दिनांक 23.04.2026ः जिलाधिकारी, पटना डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने आम जनता से अग्नि-सुरक्षा हेतु आपदा प्रबंधन विभाग एवं बिहार अग्निशमन सेवा द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन करने का आह्वान किया है। साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन के पदाधिकारियों को वृहद स्तर पर जन-जागरूकता उत्पन्न करने तथा लोगों को सुरक्षा मानकों के प्रति सेंसिटाइज करने का निर्देश दिया है।

    जिलाधिकारी ने कहा कि अग्निकांड की आपदा से निपटने हेतु आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का निर्धारण किया गया है एवं समय-समय पर एडवायजरीध्मार्ग-दर्शिका/निदेश भेजा जाता है। इसके अक्षरशः अनुपालन से अगलगी की घटनाओं को रोका जा सकता है।

    जिलेवासियों के नाम एक संदेश में जिलाधिकारी ने कहा कि 15 मार्च से 15 जून तक तीन महीना अग्नि प्रवण काल रहता है। इस समय पछुआ हवा का प्रवाह भी तीव्र गति से होता है। इस अवधि में अग्निकांड से सुरक्षा एवं बचाव हेतु विशेष सतर्कता की आवश्यकता है। ग्रीष्मकाल में विभिन्न क्षेत्रों में अग्निकांड की संभावना बढ़ जाती है। गाँव में अगलगी की घटना होने पर खेत, खलिहान, खड़ी फसल आदि में जान-माल की क्षति होती है। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसी स्थिति में आग लगने की घटनाओं की रोकथाम हेतु सुरक्षात्मक उपाय करने के लिए दिये गये निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें। आग लगने की हर छोटी-बड़ी घटना की सूचना क्षेत्रीय पदाधिकारी वरीय पदाधिकारियों को तुरत दें। मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार प्रबंधन सुनिश्चित करें। आग की छोटी-सी लौ भी एक क्षण में पूरी तरह से अनियंत्रित होकर बड़ी आग में परिवर्तित हो सकती है। अतः हर व्यक्ति के स्तर पर अपेक्षित सतर्कता आवश्यक है। आम जन को जागरूक रहना होगा।
    जिला अग्निशमन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार पटना जिला में अग्निशमन विभाग की 88 गाड़ियाँ क्रियाशील है जिसमें 12,000-12,000 लीटर क्षमता का 3 वाटर वाउजर है। 22 वाटर टेंडर 5,000-5,000 लीटर से अधिक क्षमता का है। 400-400 लीटर क्षमता की 39 गाड़ियाँ मिश्रित तकनीक (350 लीटर पानी तथा 50 लीटर फोम) पर आधारित है। 5 हाइड्रॉलिक प्लेटफॉर्म तथा 5 फोम टेंडर है। मिश्रित तकनीक पर आधारित 12 बुलेट बाइक क्रियाशील है। 2 अन्य प्रकार के वाहन हैं। इसके अलावा भी जरूरत पड़ने पर वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। जिला में 9 फायर स्टेशन है जिसमें 6 शहरी क्षेत्रों में तथा 3 ग्रामीण क्षेत्रों में है। 9 अनुमडण्ल स्तरीय अग्निशामालय पदाधिकारी कार्यरत हैं। जिलाधिकारी ने पटना जिला अन्तर्गत सभी सरकारी (अग्निशाम, पीएचईडी एवं अन्य) तथा निजी हाईड्रेन्ट एवं जलश्रोतों को क्रियाशील रखने का निदेश दिया है। उन्होंने अग्निशामालयों तथा थानों में प्रतिनियुक्त सभी अग्निशामक वाहनों को ड्राइवर एवं अन्य संसाधनों सहित 24Û7 मुस्तैद रखने का निदेश दिया है ताकि आवश्यकता की घड़ी में इसे तुरत घटना स्थल पर भेजा जाए। अग्निशामक वाहनों एवं पंपों में खराबी आने पर अतिशीघ्र उसे नियमानुसार मरम्मति करा कर चालन की स्थिति में रखें। जिलाधिकारी ने विद्युत कार्यपालक अभियंताओं को भी बिजली के तारों को सुरक्षित ऊँचाई (12 फीट से अधिक) पर व्यवस्थित करने का निदेश दिया है ताकि फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को आवश्यकता पड़ने पर गली-कूचियों में सुगमतापूर्वक पहुँचाया जा सके। गौरतलब है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी की अधिकतम ऊँचाई 12 फीट होती है।
    जिलाधिकारी द्वारा इस पर हर्ष व्यक्त की गई कि अग्निशमन सेवा का रिस्पॉन्स टाईम 2 मिनट है तथा अग्निकांड की सूचना पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी ससमय घटनास्थल पर पहुँच जाती है। उन्होंने आगे भी इसे सुनिश्चित करने का निदेश दिया।

    जिलाधिकारी ने जिले के सभी पंचायतों में अग्नि कांड के हिसाब से अतिसंवेदनशील जगहों के रूट चार्ट को नियमित तौर पर अद्यतन करने का निदेश दिया। उन्होंने सभी अग्निशामालयों से अग्निशामक वाहनों में उपलब्ध वितंतु सेट और मोबाइल सेट को सदैव कार्यरत रखने का निदेश दिया।
    डीएम ने कहा कि अग्नि की विभीषिका से बचाव हेतु सभी स्टेकहोल्डर्स द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर, एसओपी) का अनुपालन किया जाना अनिवार्य है। जिला प्रशासन पटना द्वारा नियमित तौर पर विभिन्न माध्यमों यथा प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, होर्डिंग बैनर इत्यादि माध्यमों से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आम जनता अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक हों। यह सभी के लिए आवश्यक है।
    गैस सिलेण्डर की आग से सुरक्षा एवं बचाव
    गैस सिलेण्डर से खाना बनाने के दौरान आग से बचाव हेतु ध्यान देने योग्य बातें क्या करें, क्या न करे-
    जिलाधिकारी ने कहा कि गैस सिलेण्डर से खाना बनाने के दौरान असावधानियाँ होने पर आग की घटनाएँ घटित हो जाती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए क्या करें, क्या न करें संबंधी ध्यान देने योग्य बातें निम्नवत् है-
    क्या करें-
    सुरक्षा कैप को नायलॉन धागे से सिलेण्डर के साथ बांध कर रखें।
    गैस सिलेण्डर लेते समय एवं रेगुलेटर फीट करने के बाद भी पानी से जाँच लें कि बुलबुला दे रहा है या नहीं।
    जब सिलेण्डर उपयोग में न हो तो वॉल्व पर सुरक्षा कैप लगा दें।

    . गैस सिलेण्डर हमेशा खड़े रखें।

    . गैस स्टोव को गैस सिलेण्डर के स्तर से सदैव ऊँचे प्लेटफॉर्म पर रखें।

    . जलते हुए चुल्हे को पहले रेगुलेटर से उसके बाद स्टोव वाल्व से बंद करें।

    . रेगुलेटर का पाईप समय-समय पर साफ करते रहें एवं समय पर पाईप बदल दें।

    . किचेन में एक सूती कपड़ा भिंगोकर हमेशा रखें ताकि आपात स्थिति में आग लगने पर बुझाया जा सके।

    . खाना बनाते समय एक बाल्टी पानी के साथ मग अवश्य रखें।

    . एक पोर्टेबल अग्निशमन यंत्र 04 केजी एबीसी टाईप किचेन में अथवा दरवाजे के पास बाहर रखें।

    . कपड़ों में आग लगने पर भागे नहीं बल्कि जमीन पर लुढ़कें अथवा कम्बल से लपेटकर रोल करें।

    . किचेन में हमेशा एक ही सिलेण्डर रखें।

    क्या न करें –

    . सिलेण्डर को यथासंभव बंद स्थान में न रखें।

    . चुल्हे पर उबलते हुए चाय, दूध आदि को छोड़कर किचेन से बाहर न जायें

    . खाना बनाते समय ढिला-ढाला वस्त्र का प्रयोग न करें।

    . अगर किचेन में गैस की गंध आ रही तो इलेक्ट्रिक पैनल ध् स्वीच के साथ छेड़-छाड़ न करें।

    . माचिस, सिगरेट, लाईटर एवं गैस सिलेण्डर को बच्चों के पहुँच से दूर रखें।

    . बच्चों को कभी अकेले रसोई घर में न जाने दें।

    ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अग्नि सुरक्षा से संबंधित ध्यान देने योग्य बातें क्या करें, क्या न करें-

    जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर फूस एवं खपरैल की मकानें अधिक होती है, जिसमें खाना बनाने, दीप जलाने, लालटेन जलाने इत्यादि के दौरान असावधानियाँ होने पर आग की घटनाएँ घटित होने की संभावना रहती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए क्या करें, क्या न करें संबंधी ध्यान देने योग्य बातें निम्न हैर-

    क्या करें –

    . एक बड़े से ड्रम (200 ली०) में पानी हमेशा भरकर घर या खेत खलिहानों में रखें।

    . कुछ छोटी बाल्टी में रेत या बालू रखें।

    . एक-दो जूट की पुरानी बोरी को पानी में भीगों कर रखें।

    . रोशनी के लिए बैट्री वाले संयंत्र जैसे टार्च, इमरजेंसी लाईट आदि का प्रयोग करें।

    . यदि आसपास कोई तालाब या अन्य जल स्त्रोत हो, तो वहाँ से खलिहान तक का पाईप (सिंचाई में उपयोग आने वाले पाईप) और पम्पसेट तैयार रखें।

    क्या न करेंः

    . थ्रेसर चलाने में उपयोग होने वाले डीजल इंजन या ट्रैक्टर के धुआँ वाले पाईप से हवा की दिशा में अनाज का बोझा नहीं रखें।

    . बिजली के तार के किसी भी जोड़ को ढीला या खुला न छोड़ें।

    . बिजली के जोड़ को कभी भी प्लास्टिक से नहीं बाँधे

    . बिजली के कनेक्शन के लिए कम या खराब गुणवत्ता वाले तार का प्रयोग न करें।

    . खलिहान के आस-पास बीड़ी, सिगरेट स्वयं न पीयें और न किसी अन्य को पीने दें।
    जिलाधिकारी ने कहा कि अगलगी से बचाव हेतु जनहित में ‘‘क्या करें, क्या नहीं करें’’ जारी किया गया है। आम जनता इसका अनुपालन कर अगलगी की घटनाओं को रोक सकती है। उन्होंने ‘‘क्या करें, क्या नहीं करें’’ का प्रचार-प्रसार गाँव-गाँव तक सुनिश्चित करने का निदेश दिया ताकि आम जनता को जागरूक किया जा सके।

    क्या करें

    1. स्टोव या लकड़ी, गोइठा आदि के जलावन वाले चूल्हे पर खाना बनाते वक्त सावधानी बरतें। हमेशा सूती वस्त्र पहनकर ही खाना बनायें।
    2. गेहूँ कटनी तथा ओसनी का काम हमेशा रात में तथा गाँव के बाहर खलिहान में जाकर करें।
    3. घर व खलिहान पर समुचित पानी व बालू की व्यवस्था रखें।
    4. खाना पकाते समय रसोईघर में वयस्क मौजूद रहें, बच्चों को अकेला न छोड़ें।
    5. खिड़की से स्टोव के बर्नर तक हवा न पहुँच पाए। इस बात की पूरी तसल्ली कर लें।
    6. सरकारी सहायता पाने के उद्देश्य से जानबूझकर अपनी सम्पत्ति में आग लगाने वालों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई करने में प्रशासन की मदद कर जागरूक नागरिक अवश्य बनें।
    7. तौलिये या कपड़े का इस्तेमाल सावधानी से गर्म बर्तन उतारने के लिए करें।
    8. तैलीय पदार्थ से लगी आग पर पानी न डालें या सिर्फ बेकिंग सोडा, नमक डालें या उसे ढंक दें।
    9. खिड़की के बाहर कोई चादर या तौलिया लटका दें ताकि बाहर लोगों को पता चल सके कि आप कहाँ हैं और आपको मदद चाहिए।
    10. गैस चूल्हे का इस्तेमाल करने के तुरंत बाद सिलिंडर का नॉब बंद कर दें।
    11. बिजली तारों एवं उपकरणों की नियमित जाँच करें।
    12. घर में अग्निशमन कार्यालय तथा अन्य आपातकालीन नंबर लिखा हुआ हो और घर के सभी सदस्यों को इन नंबरों के बारे में पता हो।
    13. आग लगने पर दमकल विभाग को फोन करें और उन्हें अपना पूरा पता बतायें, फिर दमकल विभाग जैसा कहे वैसा ही करें।

    क्या न करें

    1. बच्चों को माचिस या आग फैलाने वाले एवं अन्य सामानों के पास न जाने दें।
    2. बीड़ी, सिगरेट, हुक्का आदि पीकर जहाँ-तहाँ न फेंकें, उसे पूरी तरह बुझने के बाद ही फेकें।
    3. चूल्हा, ढिबरी, मोमबत्ती, कपूर इत्यादि जलाकर न छोड़ें।
    4. अनाज के ढेर, फूस या खपड़ैल की झोपड़ी के निकट अलाव व डीजल इंजन नहीं चलाएं।
    5. सार्वजनिक स्थलों, ट्रेनों एवं बसों आदि में ज्वलनशील पदार्थ न ले जाएँ।
    6. आपके कपड़े में अगर आग लग जाए तो दौड़ना नहीं चाहिए बल्कि जमीन पर लेटकर गोल-गोल कर आग बुझायें।
    7. खाना बनाने के समय ढीले-ढाले कपड़े न पहनें।
    8. अग्नि दुर्घटना के दौरान कभी भी लिफ्ट का प्रयोग नहीं करें।
    9. गैस की दुर्गंध आने पर बिजली के स्वीच को न छुऐं।
    10. खाना पकाते समय रसोईघर में बच्चों को अकेला न छोड़ें।

    डीएम ने अग्निकांड की रोकथाम हेतु सभी अंचलाधिकारियों को अपने क्षेत्र में निम्नलिखित मार्ग-दर्शिका को प्रचारित-प्रसारित कराने का निदेश दिया है-

    (क) हवा के झोंकों के तेज होने के पहले ही खाना पकाकर चूल्हे की आग को पानी से पूरी तरह बुझा दें।

    (ख) चूल्हे की आग की चिंगारी पूरी तरह बुझी हो, इसे सुनिश्चित कर लें।

    (ग) घर से बाहर जाते समय बिजली का स्विच ऑफ हो इसे सुनिश्चित कर लें।

    (घ) खाना वैसी जगह पकाया जाय, जहाँ हवा का झोंका न लगे। बीड़ी-सिगरेट पीकर इधर-उधर या खलिहान की तरफ न फेंकें।

    (च) आगजनी से बचाव हेतु उपाय क्या करें, क्या न करें को आग-प्रवण क्षेत्रों में लगातार प्रसारित किया जाए।

    (छ) गाँव/मोहल्लों में जल एवं बालू संग्रहण की व्यवस्था रखी जाय ताकि आग पर शीघ्र काबू पाया जा सके। प्रत्येक गाँव में फायर बीटर्स, फायर टैंक, बाल्टी, रस्सी एवं कुल्हाड़ी आदि छोटे-छोटे अग्निशमन उपकरण सार्वजनिक स्थल पर रखवाने की व्यवस्था पंचायत की मदद से की जाए।

    डीएम ने कहा कि अग्नि सुरक्षा प्रबंधन सुनिश्चित करने एवं जन-सामान्य की सुविधा तथा आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई हेतु कोई भी व्यक्ति अग्निशमन से संबंधित इन सम्पर्क संख्या पर सूचना दें। जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

    1. राज्य नियंत्रण कक्षः- 0612-2229998, 0612-2222214, 7485805818,
    2. जिला अग्नि नियंत्रण कक्षः- 7485805821,
    3. अनुमंडल अग्निशामालय लोदीपुरः- 7485805820, 8709091418
    4. फुलवारीशरीफः- 0612-2451100, 9507485867, 7485806113
    5. कंकड़बागः- 7903465774, 7485806121, 7485806122
    6. दानापुरः- 8789880114, 7485806118
    7. पालीगंजः- 9472300141, 7485805919
    8. मसौढ़ीः- 8804602951, 7485805894
    9. बाढ़ः- 6205523800, 9241894743
    10. सचिवालयः- 7903088301, 7485806124
    11. पटना सिटीः- 8541882804, 7485805816
    12. आपातकालीन नंबरः- 101/112

    जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुरूप अग्निकांड की सूचना प्राप्त होते ही जिला एवं अंचल के आपदा प्रबंधन के उत्तरदायी पदाधिकारी एवं उनकी टीम घटना स्तर पर शीघ्रातिशीघ्र पहुँचंगे एवं त्वरित गति से पीड़ितों को प्रावधानों के अनुसार अनुमान्य सहाय्य प्रदान करना सुनिश्चित करेंगे। भीषण अग्निकांड होने पर संबंधित अनुमण्डल पदाधिकारी स्वयं घटनास्थल पर शीघ्रातिशीघ्र पहुँच कर सहाय्य की व्यवस्था करेंगे।
    सरकार के निदेश के आलोक में अगलगी की घटनाओं की रोकथाम तथा न्यूनीकरण हेतु सम्पूर्ण पटना जिला में 14-20 अप्रैल, 2026 की अवधि में “अग्नि सुरक्षा सप्ताह” का आयोजन किया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर इस दौरान गाँव-गाँव तथा शहरों में सघन जागरूकता अभियान चलाया गया।
    जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार अग्निकांड की आपदा के प्रबंधन हेतु विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई अपेक्षित है। साथ ही संबंधित पदाधिकारियों के बीच समन्वय की भी आवश्यकता है। सभी पदाधिकारी इसे सुनिश्चित करेेंगे। जिलाधिकारी द्वारा विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों को निदेश दिया गया है कि

    (1) अग्निकांड की सूचना प्राप्त होते ही अंचल अधिकारी/अनुमण्डल पदाधिकारी घटना स्थल पर पहुँच कर राहत एवं बचाव का कार्य कराना सुनिश्चित करें। जहाँ पर अग्निकांड की बड़ी घटना प्रतिवेदित हो, वहाँ अपर समाहर्त्ता, आपदा प्रबंधन भी स्वयं शीघ्रातिशीघ्र पहुँच कर राहत एवं बचाव कार्य कराना सुनिश्चित करें।

    (2) अग्निकांड की सूचना प्राप्त होते ही आवश्यकतानुसार फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर रवाना करें। आवश्यकतानुसार 101/112 इआरएसएसय जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र (डीईओसी) की दूरभाष संख्या 0612-2210118 एवं ई-मेल आईडी dismgmtpatna@gmail.com पर अविलंब सूचित किया जाए।

    (3) गर्मी के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में अगलगी की घटनाओं की रोकथाम के संबंध में फायर ब्रिगेड के पदाधिकारी मुस्तैद रहें। अंचल अधिकारी, अनुमण्डल पदाधिकारी तथा जिला आपदा प्रबंधन कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी फायर ब्रिगेड के पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यकता पड़ने पर सार्थक कार्रवाई करें। आग लगने की घटना होने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी घटना स्थल पर ससमय पहुँच जानी चाहिए।

    (4) अग्निकांड पीड़ितों को प्रावधानों के अनुसार 24 घंटे के अंदर अनुमान्य साहाय्य यथा पॉलिथीन शीट, नकद अनुदान तथा वस्त्र एवं बर्तन के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाए। इसी प्रकार घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जाए तथा मृतकों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान का भुगतान अविलंब किया जाए।

    (5) जले एवं क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वेक्षण कर इसका जियो टैगिंग एवं फोटोग्राफी कराकर प्रावधानों के अनुसार गृह क्षति अनुदान का भुगतान शीघ्रातिशीघ्र किया जाए।

    जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आम जनता के बीच अग्नि सुरक्षा हेतु लगातार जागरूकता अभियान चलाने का निदेश दिया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन पूर्णतः मुस्तैद है।

    पदाधिकारियों को अगलगी की घटनाओं की रोकथाम तथा न्यूनीकरण हेतु सम्पूर्ण पटना जिला में सघन जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। आम जनता से भी अग्नि सुरक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी ‘‘क्या करें एवं क्या न करें’’ का अनुपालन करने तथा इसे जन-जन तक प्रसारित करने का आह्वान किया गया है। अग्नि-प्रवण काल (15 मार्च-15 जून) में विशेष सतर्कता की आवश्यकता है। लोगों को जागरूक करने के लिए जिला अग्निशमन पदाधिकारी, पटना के नेतृत्व में 3 मार्च से 9 मार्च तक विशेष साप्ताहिक जनजागरूकता अभियान चलाया गया था। सम्पूर्ण पटना जिला में 14-20 अप्रैल की अवधि में “अग्नि सुरक्षा सप्ताह” का आयोजन किया गया था। इस दौरान गाँव-गाँव तथा शहरों में ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आपदा की स्थिति में डायल-112ध्101, जिला अग्नि नियंत्रण कक्ष (7485805821), जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र (0612-2210118) या 24*7 जिला नियंत्रण कक्ष (0612-2219810ध् 2219234) पर सूचना दी जा सकती है।

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