आज सार्थक सिद्धांत नाम की चर्चा आम से लेकर खास तक कर रहे हैं। क्योंकि इस 17 साल के लड़के ने छोटी सी उम्र में ऐसा काम किया है, जो शायद बड़े से बड़े महारथी भी करने से पहले दस बार सोचते। लेकिन झारखंड के रहने वाले सार्थक सिद्धांत ने बिना डरे देश की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था के ऐसे लूप होल को उजागर कर दिया जिसके बाद सियासी गलियारों में भूचाल मच गया. जी हां, सार्थक ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) और उसके टेंडर नियमों में ऐसी गड़बड़ियां ढूंढ निकालीं कि देश की संसद को इस मामले में दखल देना पड़ा।
इसको लेकर 2 जून को दिगविजिय सिंह की अध्यक्षता वाली (शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की) संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) ने सार्थक को पेश होने का बुलाया तक भेज दिया। जिसके बाद सार्थक सिद्धांत ने संसद भवन एनेक्स में हुई बैठक में समिति के सदस्यों के सामने ओएसएम टेंडर को लेकर प्रेजेंटेशन दी और बताया कि कैसे लाखों छात्रों की कॉपियां स्कैन करने वाली कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को कथित तौर पर बदला गया।
टेंडर के नियमों में मिली खामियां
सार्थक ने संसदीय समिति को बताया कि सीबीएसई के टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना करने पर साफ पता चलता है कि नियम किसी खास सर्विस प्रोवाइडर को फायदा पहुंचाने के लिए बदले गए थे।
सार्थक के मुताबिक फरवरी 2025 में जारी पहले टेंडर में TCS और Coempt Eduteck नामक दो कंपनियों ने आवेदन किया था। बाद में इस टेंडर को पब्लिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया.
कौन हैं CBSE छात्र सार्थक सिद्धांत? खुद बताया लाखों कॉपियां स्कैन करने वाली कंपनी की कैसे खोली पोल। जानिए कौन हैं 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत, जिन्होंने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) टेंडर में गड़बड़ियों का खुलासा कर संसदीय समिति के सामने प्रेजेंटेशन दी। झारखंड के रहने वाले हैं 12वीं क्लास के छात्र सार्थक सिद्धांत। आज सार्थक सिद्धांत नाम की चर्चा आम से लेकर खास तक कर रहे हैं। क्योंकि इस 17 साल के लड़के ने छोटी सी उम्र में ऐसा काम किया है, जो शायद बड़े से बड़े महारथी भी करने से पहले दस बार सोचत। लेकिन झारखंड के रहने वाले सार्थक सिद्धांत ने बिना डरे देश की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था के ऐसे लूप होल को उजागर कर दिया जिसके बाद सियासी गलियारों में भूचाल मच गया। जी हां, सार्थक ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) और उसके टेंडर नियमों में ऐसी गड़बड़ियां ढूंढ निकालीं कि देश की संसद को इस मामले में दखल देना पड़ा।
इसको लेकर मंगलवार को दिगविजिय सिंह की अध्यक्षता वाली (शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की) संसदीय स्थायी समिति ने सार्थक को पेश होने का बुलाया तक भेज दिया। जिसके बाद सार्थक सिद्धांत ने संसद भवन एनेक्स में हुई बैठक में समिति के सदस्यों के सामने ओएसएम टेंडर को लेकर प्रेजेंटेशन दी और बताया कि कैसे लाखों छात्रों की कॉपियां स्कैन करने वाली कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को कथित तौर पर बदला गया।
टेंडर के नियमों में मिली खामियां
सार्थक ने संसदीय समिति को बताया कि सीबीएसई के टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना करने पर साफ पता चलता है कि नियम किसी खास सर्विस प्रोवाइडर को फायदा पहुंचाने के लिए बदले गए थे।
सार्थक के मुताबिक फरवरी 2025 में जारी पहले टेंडर में TCS और Coempt Eduteck नामक दो कंपनियों ने आवेदन किया था। बाद में इस टेंडर को पब्लिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया। CBSE इसे सलाहकार क्यों नहीं बनाती? संसदीय समिति के सामने छात्र सार्थक के प्रजेंटेशन पर तालियां बजी CBSE के चेयरमैन और सचिव को हटाया गया, OSM विवाद के बाद सरकार का बड़ा एक्शन। 1 जून को खुलना था Re & evaluation पोर्टल, लिंक न खुलने से छात्र परेशान, CBSE ने X पर बताया कब होगा लाइव
This is a request to my friends in the media and to the many journalists who have reached out to me-
Please understand that my schedule is currently quite packed and I am unfortunately not available for interviews or video calls today or tomorrow-
I genuinely appreciate the…
— Sarthak Sidhant @sidhant_sarthak June 1] 2026
वहीं, नए टेंडर में CySdfyfLVax Poor Performance और टर्नओवर से जुड़े कड़े नियमों को इस तरह घुमाया गया कि Coempt Eduteck कंपनी आसानी से क्वालीफाई कर सके।
साथ ही टेंडर के डॉक्यूमेंट के आधार पर पुराने टेंडर में खराब परफॉर्मेंस से जुड़े तीन क्लॉज थे, जिसके अनुसार लापरवाही बरतने पर कंपनी अयोग्य हो जाती, लेकिन नए नियम यानी RFP में इसे पूरी तरह हटा दिया गया। इसके अलावा अनिवार्य CMMI लेवल और प्रोजेक्ट पात्रता के मानदंडों में भी ढील दी गइ।
कंपनी का पुराना विवादित रिकॉर्ड आया सामने
आपको बता दें कि सार्थक ने जिस Coempt Eduteck कंपनी पर सवाल उठाए हैं, उसका पिछला रिकॉर्ड भी विवादों में रहा है । सार्थक के ब्लॉग के अनुसार, इस कंपनी का पुराना नाम Globarena Technologies था। यह वही कंपनी है जो 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद में घिरी थी, जहां बड़े पैमाने पर मार्क्स और रिजल्ट में गड़बड़ी के बाद छात्रों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था।
Your data was breached- CBSE will not blacklist the vendor] as per the new corrigendum https://t-co/T8RvcD8QWD pic-twitter-com/1pzUpzzS9t
— Sarthak Sidhant @sidhant_sarthak June 1] 2026
इसको लेकर सार्थक ने सवाल किया कि जिसका पिछला रिकॉर्ड विादित था उसे आखिर देश के लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़े सीबीएसई ओएसएम का टेंडर कैसे मिल गया?
मैं सिस्टम के खिलाफ नहीं, बस पारदर्शिता चाहता हूं। इसको लेकर सार्थक सिद्धांत ने साफ किया कि वह ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSMके खिलाफ नहीं हैं। बल्कि उनका मानना है कि परीक्षा प्रणाली में OSM एक अच्छा बदलाव है, लेकिन इतने बड़े लेवल पर लागू करने से पहले बड़े पैमाने पर टेस्टिंग होनी चाहिए थी, ताकि कमियों को सुधारा जा सक।
सार्थक सिद्धांत ने इसी साल सीबीएसई से 12वीं की परीक्षा दी थी। और बोर्ड ने भी इसी साल से रिजल्ट को और बेहतर करने के उद्देश्य से नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम यानी OSM लागू किया था । लेकिन जब रिजल्ट आया, तो मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठने लगे। कुछ बच्चों की कॉपियों आपस में बदल गईं , तो कुछ बच्चों के नंबर जोड़ने में गड़बडी जैसे कई मामले सोशल मीडिया पर उजागर होने लगे। इन सब के बीच सार्थक ने भी अपनी आंसर शीट (Scan Copy) के पुनर्मूल्यांकन (Re&evaluation) के लिए अप्लाई किया।
@cbseindia29 good morning CBSE] you said you used scanners to scan these copies]
now since the copies are out to the public view] do you mind eÛplaining
which copies when scanned through a scanner] have a drop shadow\ and these 3 folds\
did you really use scanners\ pic-twitter-com/GF2I9FiKLh
— Sarthak Sidhant@sidhant_sarthak May 31 2026
जब स्कैन की हुई आंसर शीट उनके हाथ में आई, तो उन्हें कुछ गड़बड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद सार्थक ने पीछे हटने के बजाय सीबीएसई के टेंडर डॉक्यूमेंट्स को खुद खंगालना शुरू कर दिया।
कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने जो सच निकाला, उसे एक ब्लॉग के जरिए सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिसने देखते ही देखते बवाल खड़ा कर दिया।
सरकार ने आज मामले की गंभीरता और चारों तरफ सीबीएसई की हो रही किरकिरे को देखते हुए बड़ा एक्शन ले लिया। सराकर ने तत्काल प्रभाव से सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव (सेक्रेटरी) हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटा दिया है। साथ ही एक जांच समीति का भी गठन कर दिया है। जिसकी अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चैहान करेंगी। बता दें कि समिति की अध्यक्ष को आवश्यकतानुसार, अन्य कार्यालयों के अधिकारियों से सहायता प्राप्त करने का अधिकार होगा।
आज एक 17 साल के छात्र की इस मुहिम ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल दौर में सजग नागरिक होना कितना जरूरी है।
CBSE के छात्र सार्थक सिद्धांत को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था, यहां इस छात्र ने कुछ ऐसी प्रजेंटेशन दी कि सभी लोग काफी इंप्रेस हो गए । सार्थक ने COEMPT कंपनी को दिए गए कथित टेंडर को लेकर कई चीजें सामने रखी।
शिक्षा मामलों की संसदीय समिति की बैठक कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में 11 बजे शुरू हुई। इस बैठक का आज दूसरा दिन था। जब बैठक शुरू हुई तब तक उस वक्त तक CBSE के अधिकारियों को भी नहीं पता था कि COEMPT कंपनी को कथित टेंडर देने के मामले की खामियों को उजागर करने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत इस कमेटी के सामने पेश होकर प्रजंटेशन देंगे। स्थाई समिति की बैठक में शामिल सूत्रों के मुताबिक सार्थक ने अपने प्रजेंटेशन में सवाल उठाया कि जब टेंडर के लिए Request वित Proposal जारी किया गया तब उसमें फेरबदल क्यों किया गया?
सार्थक ने इन बातों का किया जिक्र
COEMPT कंपनी के बैलेंस शीट के मुताबिक RFP में 50 करोड़ रखना हो या Blacklisted Earlier लिखना हो… या फिर कंपनी के पहले नाम Globarena के तेलांगाना शिक्षा बोर्ड के तहत काम करना हो। इस सब पर सार्थक ने सिलसिलेवार तरीके से सदस्यों के सामने बात रखी। बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया में सार्थक सिद्धांत ने अपने बिंदुओं को रखा, जिससे स्थाई समिति के ज्यादातर सदस्य सहमत दिखाई दिए । सूत्रों ने बताया कि सार्थक के प्रजंटेशन पर कुछ सदस्यों ने तालियां तक बजाईं। कुछ सदस्यों ने CBSE के अधिकारियों को इशारों ही इशारों में बताया कि इस मुद्दे पर इतना अच्छा रिसर्च बच्चे ने किया इसे तो आपको सलाहकार बनाना चाहिए।
करीब तीन घंटे से ज्यादा चली इस बैठक खत्म होने के बाद दिग्विजय सिंह जब बाहर निकले तब उन्होंने मीडिया से कहा कि ये कमेटी का काम है कि हम जो भी करेंगे वो छात्रों की भलाई के लिए ही होगा। हालांकि सार्थक ने अपने प्रजेंटेशन में जो सवाल टेंडर प्रक्रिया पर उठाए हैं, उसका जवाब CBSE अगली बैठक में सदस्यों को देगी। इतना ही नहीं सूत्रों के मुताबिक CBSE को सदस्यों ने कहा कि जो कुछ हुआ उसका जिम्मेदार कौन है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, इस तरह की घटना के बाद जवाबदेही तय होनी चाहिए ।
शिक्षा,महिला,बाल,युवा और खेल मामलों की इस समिति में 31 सदस्य होते हैं और आज भी करीब दर्जन भर अधिक सदस्य मौजूद थे। बैठक में दिग्विजय सिंह के अलावा रविशंकर प्रसाद, संबित पात्रा, जिया उर रहमान वर्क जैसे सांसदों के अलावा शिक्षा सचिव और सीबीएससी चेयरमैन भी मौजूद थे।
आईएएस अधिकारी राहुल सिंह को हटाया गया या बचाया गया?
बिहार कैडर के 1996 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल सिंह को 2024 में सीबीएसई के चैयरमैन की जिम्मेदारी दी गई थी। जब उनका कार्यकाल खत्म हो रहा था तो सरकार ने इसे दो साल तक बढ़ा दिया था। ऑन स्क्रीन मार्किंग OSM को लेकर चल रहे विवाद के बीच आखिरकार सरकार ने CBSE अधिकारियों के खिलाफ एक्शन ले लिया है। सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया है। CBSE के री-इवैल्यूएशन प्रोसेस के बीच दोनों बड़े अधिकारियों को हटाने का फैसला लिया गया है। इससे पहले री-इवैल्यूएशन पोर्टल शुरू होने में हुई देरी और फिर टेक्निकल से लगातार सरकार की किरकिरी हो रही थी। आइए जानते हैं कि सीबीएसई के चीफ रहे राहुल सिंह कौन हैं और उन्हें कब इस पद पर नियुक्त किया गया था। कौन हैं राहुल सिंह?
राहुल सिंह बिहार कैडर के 1996 बैच के आईएएस अधिकारी है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बी.टेक किया है और उनके पास पब्लिक पॉलिसी एंड मैनेजमेंट (सार्वजनिक नीति और प्रबंधन) में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री भी है। 26 मार्च 2024 को उन्हें सीबीएसई में बतौर चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति मिली थी। अपने लंबे करियर में राहुल सिंह ने कई बड़े और अहम पदों पर काम किया है, जिसमें एडिशनल सेक्रेट्री से लेकर ज्वाइंट सेक्रेट्री और सचिव जैसे पद शामिल हैं।
सरकार ने दिया था दो साल का एक्सटेंशन
IAS अधिकारी राहुल सिंह पर भले ही अब एक्शन लिया गया है, लेकिन सरकार ने उन्हें 2025 में दो साल का एक्सटेंशन यानी सेवा विस्तार भी दिया था। 13 मार्च 2024 को CBSE चेयरमैन के पद पर नियुक्त होने के बाद उनका कार्यकाल खत्म हो रहा था, जिसे दो साल के लिए बढ़ाया गया। तब बताया गया था कि राहुल सिंह 11 नवंबर 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे। हालांकि अब ऑन स्क्रीन मार्किंग के विवाद की गाज उन पर गिरी है।
लगातार उठ रहे थे सवाल
सीबीएसई 12वीं रिजल्ट जारी होने के बाद से ही विवादों में रहा है। सबसे पहले छात्रों ने कम नंबर के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग का जमकर विरोध किया और इसके बाद जब छात्रों की परेशानी हल करनी थी, तब सीबीएसई अपने ही पोर्टल के ग्लिच ठीक करने में लगा था। ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए स्कैन की गई कॉपियों में गड़बड़ी से लेकर स्कैन करने वाली कंपनी पर उठ रहे सवालों के बीच बोर्ड और सरकार की खूब किरकिरी हो रही थी। ऐसे में अब सरकार ने बोर्ड के सबसे बड़े अधिकारियों के खिलाफ ये कार्रवाई की है।
सार्थक, अपने सिद्धांतों पर अडिग रहो। – राहुल गांधी , कांग्रेस नेता विपक्ष (ट्विट )









