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  • उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को देना होगा इस्तीफा?

    बिहार में विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव और 9 सीटों पर चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। एनडीए की तरफ से आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी गई है। उम्मीदवारों की घोषणा से सबसे बड़ा झटका राज्यसभा


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    बिहार में विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव और 9 सीटों पर चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। एनडीए की तरफ से आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी गई है। उम्मीदवारों की घोषणा से सबसे बड़ा झटका राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लगा है। आपको बता दें कि वह वर्तमान में बिहार के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उन्हें अब मंत्री पद से इस्तीफा देने पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक सीट लोजपा के खाते में जा सकती है।
    बिहार में इस विधान परिषद चुनाव में किसी भी एक उम्मीदवार को जीत के लिए 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यक्ता होगी। इस हिसाब से एनडीए के पास 8 एमएलसी जिताने के लिए प्रयाप्त संख्याबल हैं। बिहार में एनडीए में शामिल भाजपा के 89, जेडीयू के 85, चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के 5 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सिर्फ 4 विधायक हैं।
    बिहार में एमएलसी चुनाव में कैंडिडेट बनने के लिए कम से कम 10 प्रस्तावक की आवश्यक्ता होती है। ये सभी प्रस्तावक विधानसभा से चुनकर आए हों। दीपक प्रकाश की पार्टी के सिर्फ 4 विधायक हैं। ऐसे में इनका उम्मीदवार बनना भी मुश्किल है। अगर एनडीए की तरफ से इन्हें नौवां उम्मीदवार बनाया भी जाता है तो कुशवाहा के बेटे को आरजेडी और कांग्रेस में टूट का इंतजार करना होगा। हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव के दौरान ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। महागठबंधन के कई विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे। 41 विधायकों के बावजूद आरजेडी के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था और भाजपा के शिवेश राम चुनाव जीतने में सफल रहे थे।
    एनडीए के दोनों प्रमुख दलों जदयू और भाजपा ने अपने-अपने कोर वोटरों का पूरा ध्यान रखा है। इन आठ उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ा समाज से जबकि तीन महिलाएं हैं। जदयू ने तीन जबकि भाजपा ने दो अतिपिछड़ों को मौका दिया है। भाजपा ने अपने हिस्से की चार सीटों में से दो सवर्णों के हवाले किया है। घोषित उम्मीदवारों में भाजपा के संजय मयूख को छोड़कर निशांत समेत शेष सात उम्मीदवार पहली बार विधान परिषद जाएंगे। एनडीए की ओर से 9वीं सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश का भी विधान परिषद जाना तय है। जल्द ही रालोमो उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करेगी।
    जदयू ने उम्मीदवारों के चयन में आधार वोट के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा है। जदयू की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी दी गयी है। पार्टी के चार उम्मीदवारों में एक पिछड़ा तो तीन अति पिछड़ा हैं। इनमें एक कुर्मी, एक नोनिया, एक कुम्हार और एक धानुक जाति से हैं।
    भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह काराकाट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़े थे। हाल के दिनों में पवन सिंह की मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेताओं से हुई थी। उसी समय से कयास लगाया जा रहा था कि पवन सिंह को कुछ अहम जिम्मेवारी दी जाएगी। वहीं, डॉ. संजय मयूख को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है। वे लगातार तीसरी बार उच्च सदन के सदस्य होंगे। इसके पहले पार्टी ने गंगा प्रसाद और मंगल पांडेय को लगातार तीन बार विधान परिषद भेजा था। अनिल कुमार ठाकुर अतिपिछड़ा वर्ग में नाई जाति से आते हैं। वे अभी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वहीं शीला पंडित (प्रजापति) अभी बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं। वह डॉ. संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहते प्रदेश मंत्री और सम्राट चैधरी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर चुकी हैं।

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