पटना। आज पटना म्यूजियम सभागार में कला इतिहास में बिहार की महिलाएँ विषय पर एक गंभीर चर्चा हुई जिसमें वरिष्ठ नाट्यकर्मी तथ लेखक, प्रो एन एन पांडे और वरिष्ठ पत्रकार तथा कला लेखिका रीना सोपम ने इस विषय पर अपने विचार रखे.
यह चर्चा सिने सोसायटी और पटना म्यूजियम के सहयोग से आयोजित था और वार्ताकार थे युवा कवि कुमार विमलेंदु.
विषय प्रवेश करते हुए प्रो जयमंगल देव ने कहा कि हाल ही प्रो पांडे की किताब, देहरी से द्वार तक और रीना सोपम की किताब, हस्ताक्षर, कला इतिहास में बिहार की महिलाएँ आई हैं जिनके केंद्र में महिलाएं हैं. चूँकि इन पर कम बात होती रही है अतः लाजिमी था कि उनपर चर्चा हो.
कुमार विमलेंदु ने कहा कि अरसे बाद इस तरह की किताब आई है जिसमे महिलाएँ केंद्र में हैं. किताबों का नाम ही पाठकों के मन में उत्सुकता जगाता है कि किस तरह इसकी कल्पना की गई होगी.

पत्रकार रीना सोपम ने कहा कि हस्ताक्षर केवल प्रदर्श कला क्षेत्र की महिला कलाकारों पर केंद्रित हैं जो बिहार के संभ्रांत परिवारों से थीं और आजादी के बाद के वर्षों में ही कला के विभिन्न क्षेत्रों में खूब सक्रिय थीं.
रीना सोपम ने कहा कि इन महिलाओ के सहारे ही देश की प्राचीन कला परंपरा जीवित रही थी, लेकिन उनके योगदानो पर कभी लिखा नहीं गया था. पत्रकारिता के दौरान कुछ ऐसी महिला कलाकारों से भेंट हुई तो लगा कि उनका योगदान यूँ भुलाया नहीं जा सकता है. अतः उनकी जीवनी संकलित कर उसे किताब की शक्ल दे दी। इसमें कुमुद अखौरी, विंध्यवासिनी देवी, शांति जैन और शारदा सिंहा से लेकर कत्थक कलाकार चंदना डे और रमा दास, आकाशवाणी अभिनेत्री शांति देवी, तथा रंगकर्मी नवनीत शर्मा और सिने अभिनेत्री नूर फातिमा की भी चर्चा है। साथ ही, कला संरक्षण मे बिहार की कुछ महिलाओ, अजीजा इमाम, सावित्री देवी और उमा-गौरी चटर्जी ने जो महत्वपूर्ण काम किए, उसकी चर्चा पहली बार हुई इस किताब में। सच कहें तो अपने समाज ने महिलाओ की जिन उपलब्धियों और योगदानो को अनदेखा किया, उसी भूल सुधार की प्रक्रिया है हस्ताक्षर, कला इतिहास में बिहार की महिलाएँ।
प्रो एन एन पांडे ने कहा कि दूरदर्शन और आकाशवाणी से वे अरसे से जुडे रहे हैं और इन जगहों के लिए कुछ विशिष्ट महिलाओ पर फीचर किए थे। इसमे अनेक क्षेत्र की विशिष्ठ महिलाओं से जो बातचीत की, उसीको किताब की शक्ल दे दी गई. इसमें महिला कलाकार तो हैं हीं, बल्कि शिक्षा, नर्सिंग, समाज सेवा, आकाशवाणी इत्यादि के क्षेत्र मेंं भी जो महिला विशिष्ट रहीं, उनकी चर्चा है.
किताब लिखने के क्रम मे आई चुनौतियों पर चर्चा करते हुए रीना सोपम ने कहा हस्ताक्षर मे शामिल अधिकतर महिला कलाकारों की तीसरी पीढी है जो अपने बुजुर्गों की उपलब्धियों से अनजान हैं अतः जानकारियाँ बहुत मुश्किल से मिली और तस्वीरें निकालना तो और भी कठिन रहा था. प्रो पांडे ने भी सहमति जताते हुए कहा कि ऐसी ही चुनौतियाँ मिली उन्हे भी.
अंत में धन्यवाद ज्ञापन सिने सोसाइटी के प्रशांत कुमार ने किया. कुमार विमलेंदु ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया.
इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य लोग, प्रो इंद्रकांत झा, बी के जैन, श्यामल दास, सरिता जी,
भारती शर्मा, डॉ रेखा, डॉ रीता दास, सुषमा पांडे इत्यादि उपस्थित रहे।









