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  • बिहार MLC चुनाव में बड़ा खेल!

    सीटों का नया गणित NDA को दिला रहा बढ़त तो महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं; नीतीश की जगह निशांत और मंगल की जगह दीपक का नाम तय और भगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपुर से विधायक चुने गए थे। इसके अतिरिक्त तीन सीटों पर उपचुनाव भी होना है। इनमें एक सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की और दूसरी सीट


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    सीटों का नया गणित NDA को दिला रहा बढ़त तो महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं; नीतीश की जगह निशांत और मंगल की जगह दीपक का नाम तय और भगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपुर से विधायक चुने गए थे।

    इसके अतिरिक्त तीन सीटों पर उपचुनाव भी होना है। इनमें एक सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की और दूसरी सीट बीजेपी नेता मंगल पांडेय की है। ये दोनों सीटें विधानसभा कोटे की हैं। मंगल पांडेय विधायक बन चुके हैं, जबकि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बनकर एमएलसी पद से इस्तीफा दे चुके हैं। दोनों का कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन इस्तीफे के कारण सीटें रिक्त हो गई हैं।

    तीसरी उपचुनाव वाली सीट जदयू के राधाचरण सेठ की है, जो स्थानीय प्राधिकार कोटे से भोजपुर-बक्सर निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुने गए थे। उन्होंने संदेश विधानसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 2028 तक था।

    अगर पूरे गणित को समझा जाए तो यह चुनाव काफी हद तक राज्यसभा की तरह दिखाई देता है, जहां संख्या बल ही सबसे बड़ा फैक्टर होता है। विधानसभा की कुल 243 सीटों के आधार पर देखा जाए तो किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इसका फॉर्मूला है—कुल विधायकों की संख्या को कुल सीटों की संख्या से भाग देकर उसमें एक जोड़ना।

    यानी 243 ÷ 10 = 24.3, जिसे गोल करके 25 माना जाता है। इसी आधार पर एमएलसी चुनाव का गणित तय होता है।

    अगर महागठबंधन के कुल विधायकों की संख्या देखें तो यह लगभग 41 बैठती है। ऐसे में उनके लिए दो उम्मीदवार उतारना मुश्किल माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे वह अधिकांश सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में नजर आ रहा है।

    राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, जिन सीटों पर उपचुनाव होना है, वहां एनडीए की पकड़ मजबूत मानी जा रही है और संभावना है कि ये दोनों सीटें भी उसी के खाते में जाएंगी। मौजूदा स्थिति में महागठबंधन के पास जो तीन सीटें हैं, उनमें से भी आरजेडी अपनी एक सीट ही बचा पाने की स्थिति में दिख रही है।

    वहीं एनडीए के भीतर देखें तो बीजेपी के पास 2 और जदयू के पास 4 मौजूदा सीटें हैं। दोनों दलों के पास क्रमशः 85 और 80 विधायक होने के कारण इनका पलड़ा स्पष्ट रूप से भारी है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि 12 सीटों के इस पूरे चुनावी गणित में जदयू और बीजेपी का दबदबा बना रहेगा एनडीए को इस चुनाव में स्पष्ट बढ़त मिल सकती है।

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